शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: शिक्षकों को निलंबित करने की जगह अब दी जाएगी डबल पेनल्टी

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में जल्द ही एक नया सिस्टम और नजरिया नजर आएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभाग में रिफार्म के साथ ही प्रशासनिक कसावट को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। आमतौर पर यह देखने में आता है, शिक्षकों को मनपंसद स्कूल नहीं मिलने या शहर व आसपास में पदस्थापना में असफल होने के बाद निलंबन का खेला करते हैं। निलंबित होने के बाद बहाली और फिर मनमाफिक जगह पर पोस्टिंग। इस खेल में शिक्षा से लेकर शिक्षा विभाग का पूरा सिस्टम साथ होता है। लेनदेन की संभावना से भी इंकार नहीं कर सकते। मंत्री ने अब इस खेला पर पूर्णविराम लगाने की योजना बना ली है। अब शिक्षक निलंबित नहीं होंगे। लापरवाही की सजा राज्य सरकार कुछ इस अंदाज में देगी।

मंत्री व विभाग के आला अफसरों का मानना है, नए नियमों के जरिए निलंबन का खेला करने वाले शिक्षक व विभाग के अधिकारी पर प्रभावी लगाम कसा जा सकता है। गफलत करने वाले शिक्षकों को निलंबन की सजा देने के बजाय विभाग कड़ाई बरतने का निर्णय लिया है। शहर व आसपास के स्कूलों के बजाय इतनी दूर तबादला किया जाएगा, निलंबन जैसी आदतों को भूलना पड़ेगा।

आमतौर पर यह देखने में आया है, निलंबन के बाद शिक्षकों को सैलेरी भरपूर मिलते रहती है। निलंबन सजा ना होकर घुमने-फिरने का बड़ा जरिया बन जाता है। जब अपना काम पूरा हो जाता है, तब फिर अपनी उस योजना पर काम करना शुरू कर देते हैं जिसके लिए अधिकारी से मिलकर निलंबन का खेला किया गया था। निलंबन से बहाली और फिर मनचाहे स्कूल में पोस्टिंग। आमतौर पर यह देखने में आया है निलंबन पूरी तरह फिक्स होता है। फिक्सिंग के खेल में शिक्षक से लेकर अधिकारी व पूरा सिस्टम साथ होता है|

युक्तियुक्तकरण के दौरान देखने में आया है, जिन शिक्षकों का नाम युक्तियुक्तरण की सूची में शामिल था और जिनकी पोस्टिंग 30 40 किलोमीटर कर दी गई थी, ऐसे शिक्षकों ने निलंबन को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। डीईओ और कार्यालय के बाबुओं से मिलीभगत कर सबसे पहले पदस्थापना आदेश की नाफरमानी का हवाला देते हुए डीईओ ने निलंबन आदेश जारी कर दिया। निलंबन के कुछ महीने बाद बहाली आदेश के साथ मनपसंद स्कूल में पोस्टिंग। ऐसे चलता है निलंबन और मनपसंद स्कूल में पोस्टिंग का खेला।

निलंबन फिर बहाली और उसके बाद पोस्टिंग के गोरखधंधे की शिकायत स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के पास पहुंची। इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अब डीपीआई का आदेश जारी हुआ है। माना जा रहा है इस आदेश के बाद इस तरह के गोरखधंधे पर अंकुश लगेगा।

निलंबन के बजाय अब इस अंदाज में स्कूल शिक्षा विभाग खटराल अफसरों व शिक्षकों पर लगाम कसेगा। जिस लेक्चरर के खिलाफ इस तरह की शिकायत मिलेगी तो उनका तबादला 200 किलोमीटर दूर के स्कूल में किया जाएगा। विभाग उस पर निगरानी रखेगा और संबंधित स्कूल में पोस्टिंग के बाद लंबे समय तक उनको उसी स्कूल में रहकर काम करना होगा। सहायक शिक्षक व शिक्षकों को संभाग के भीतर रिमोट एरिया में तबादला किया जाएगा और उनकी सेवाएं वहीं ली जाएगी।अगर मामला गंभीर निकला तो निलंबन के बजाय विभागीय जांच संस्थित की जाएगी।

स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी की थी। इसमें विवाद की स्थिति बनी और शिक्षकों ने हाई कोर्ट का रुख भी किया। डीईओ कार्यालय में बैठे खटराल अफसरों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। पहले निलंबन और फिर बहाली का खेल। शिक्षा विभाग ने निलंबन और बहाली का खेल काफी पुराना है, इस खेल में डीईओ कार्यालय के अफसर से लेकर बाबू और संबंधित शिक्षक सभी की मिलीभगत रहती है। यह जरुर अटपटा लगता है, कोई शिक्षक भला क्यों निलंबित होना चाहेगा। निलंबन उन शिक्षकों व अधिकारियों का पुख्ता हथियार है, जिसे मनचाहे स्कूल में पदस्थ होना है या संबंधित शिक्षक शिक्षक को पोस्टिंग देनी है। निलंबित और मनचाहे स्कूल में पोस्टिंग कराना बेहद आसान और कारगार तरीका है।

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