चर्चित विराट अपहरण कांड: हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत, उम्रकैद की सजा बरकरार, सगी चाची ने रची थी साजिश
बिलासपुर। 7 साल पहले बिलासपुर शहर को दहला देने वाले हाईप्रोफाइल विराट सराफ अपहरण कांड में शामिल सभी पांचों आरोपियों की उम्रकैद की सजा हाई कोर्ट ने बरकरार रखी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी। अपहरण की साजिश की मुख्य सूत्रधार पीड़ित बच्चे की सगी चाची थी। उसने चंद रुपयों के लालच और कर्ज चुकाने के लिए अपने ही घर के बच्चे के अपहरण की साजिश रची।
पुलिस जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी नीता सराफ पर भारी कर्ज था। इस कर्ज को चुकाने के लिए उसने अपने परिचित अनिल सिंह के साथ मिलकर पहले एक अन्य रिश्तेदार सत्यनारायण सराफ के बेटे के अपहरण की योजना बनाई थी। लेकिन जब वह परिवार शहर से बाहर चला गया, तो उन्होंने अपना टारगेट बदलकर 9 वर्ष के विराट सराफ को बना लिया। साजिश के तहत आरोपियों ने बिलासपुर के ही सतीश शर्मा, राजकिशोर सिंह और हरेकृष्ण कुमार को साथ लिया। वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीका अपनाया। उन्होंने सब्जी मंडी के एक गुपचुप ठेले वाले का मोबाइल टॉर्च जलाने के बहाने लिया और धोखे से उसका सिम कार्ड निकाल लिया। इसके बाद एक पुरानी मोबाइल दुकान से 700 रुपए में सेकेंड हैंड कीपैड फोन खरीदा और उसी चुराए हुए सिम से विराट के घर के आसपास कई दिनों तक रेकी की।
विराट 20 अप्रैल 2019 की शाम अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था, तभी आरोपी बिना नंबर की सफेद वैगन-आर कार से वहां पहुंचे। आरोपी हरेकृष्ण ने विराट का मुंह दबाया और उसे जबरन कार में खींच लिया। इसके बाद बच्चे को रेलवे स्टेशन ले जाया गया, जहां उसे राजकिशोर की डस्टर कार में शिफ्ट कर जरहाभाठा स्थित एक मकान में बंधक बना दिया गया।
अपहरण के अगले ही दिन विराट के पिता विवेक सराफ के पास 6 करोड़ की फिरौती का फोन आया। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर बच्चे की सलामती चाहते हो तो पैसों का इंतजाम कर लो, नहीं तो बच्चे को काटकर फेंक देंगे। घबराए पिता ने मामले की रिपोर्ट सिटी कोतवाली थाने में दर्ज कराई।
अपहरण के बाद से ही चाची नीता सराफ रोज पीड़ित परिवार के घर सुबह से शाम तक बैठी रहती थी। वह पुलिस और परिवार की हर रणनीति की जानकारी बाहर अपने साथियों को लीक कर रही थी। तत्कालीन आईजी के निर्देश पर तत्कालीन एसपी के नेतृत्व में बनी स्पेशल टीम ने जब फिरौती वाले नंबर को सर्विलांस पर लिया, तो उसकी लोकेशन यूपी-बिहार और बिलासपुर के बीच घूमती मिली। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से साफ हो गया कि सभी पांचों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। 26 अप्रैल 2019 की सुबह पुलिस ने जरहाभाठा में राजकिशोर के सूने मकान पर छापा मारा। कमरे का ताला तोड़कर पुलिस ने मासूम विराट को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से आरोपी हरेकृष्ण को भी दबोचा गया, जो एग्जॉस्ट फैन के छेद से भागने की कोशिश कर रहा था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: समाज में डर पैदा करने वाला अपराध
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि मासूम बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण करना बेहद गंभीर और संगीन अपराध है। यह न केवल पीड़ित परिवार को मानसिक आघात पहुंचाता है, बल्कि पूरे समाज में डर और असुरक्षा की भावना पैदा करता है। हाई कोर्ट ने माना कि पुलिस ने सीडीआर, फिंगरप्रिंट, सीसीटीवी फुटेज और वॉयस सैंपल के जरिए आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत और अटूट कड़ी पेश की है, जिसके बाद आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। सभी दोषी जेल में ही अपनी सजा काटेंगे।