हाई कोर्ट का अहम आदेश: 14 सप्ताह की गर्भवती पीड़िता के मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मेडिकल बोर्ड की निगरानी में होगा गर्भपात

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बिलासपुर। दुष्कर्म से गर्भवती हुई युवती की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की माैजूदगी में गर्भपात कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सिम्स या जिला अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं के साथ भर्ती कराने व अबॉर्शन के बाद डीएनए सैम्पल सुरक्षित रखने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।

दुष्कर्म पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा है, वह अनाचार की घटना की वजह से गर्भवती हुई, वह गर्भपात कराना चाहती है। प्रेग्नेंसी उसे मानसिक और शारीरिक तकलीफ दे रही है। याचिकाकर्ता पीड़िता ने कहा है, वह ऐसे अनाचारी व्यक्ति से बच्चा पैदा करना नहीं चाहती, जो उसकी सहमति के बगैर उसके साथ दुष्कर्म किया हो। अनाचारी व्यक्ति ने इस तरह की घटना को अंजाम देकर उसे समाज के साामने शर्मिंदा करने का काम किया है। याचिकाकर्ता ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में अबॉर्शन की गुहार कोर्ट से लगाई है। याचिकाकर्ता पीड़िता ने अपनी स्थिति का हवाला देते हुए जल्द से जल्द सिम्स में भर्ती कराने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में अबॉर्शन कराने का निर्देश देने की मांग कोर्ट से की है।

दुष्कर्म पीड़िता की याचिका की सुनवाई 19 मई 2026 को वेकेशन कोर्ट में हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर, बिलासपुर को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बनाने और पीड़िता के स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ ही मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 (शॉर्ट में ‘एक्ट, 1971’) के सेक्शन 3 (2) और 1971 के एक्ट के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है,दुष्कर्म पीड़िता को यह तय करने की आजादी और अधिकार मिलना चाहिए, उसे प्रेग्नेंसी जारी रखना है या फिर अबॉर्शन कराना है। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता 14-16 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में है। जब तक ज्यूडिशियल ऑर्डर नहीं मिल जाता, तब तक चिकित्सकों के लिए प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है,पीड़िता की हालत और पूर्व के आदेशों को देखते हुए रिट याचिका को मंजूर की जाती है। वेकेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, याचिकाकर्ता को आज या फिर कल सुबह सिम्स में पूरी चिकित्सा सुविधा के साथ भर्ती कराई जाए। चिकित्सकों द्वारा पीड़िता का स्वास्थ्य परीक्षण और माता-पिता से सहमति लेकर पीड़िता का अबॅार्शन करने के लिए विशिषज्ञ चिकित्सकों की टीम बनाई जाए।

वेकेशन कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में पीड़िता का अबॉर्शन करने के बाद डीएनए सैम्पल सुरक्षित रखा जाए। दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ निचली अदालत में आपराधिक मामला लंबित है, इसलिए डीएनए सैम्पल सुरक्षित रखना होगा।

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