जाति प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा! विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर 70 से अधिक लोगों ने पाई सरकारी नौकरी
बिलासपुर। बिलासपुर जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने वालों की बाढ़ सी आ गई है। केंद्र व राज्य सरकार के उन निर्देशों का जमकर फायदा उठा रहे हैं, जिसमें पिछड़ी विशेष जनजाति बैगा समुदाय के युवाओं को नौकरी देने का निर्देश है। बैगा जनजाति के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वाले संगठित गिरोह ने ऐसा चकरी चलाया, अकेले बिलासपुर जिले में 70 से अधिक लोग सरकारी नौकरी हथिया ली है। फर्जीवाड़े के इस खेल में राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र हो या फिर फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र, छत्तीसगढ़ में इस तरह के दो संगठित गिरोह बेहद शातिराना अंदाज में अपने काम को अंजाम दे रहा है। छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले में फर्जी दिव्यांग और फर्जी विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का जाति प्रमाण पत्र बनाने का खेल चल रहा है। लगातार शिकायतों के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, दुष्परिणाम ये, गिरोह अपने धंधे में कामयाब हो रहा है और असली विशेष जनजाति के युवक बेरोजगार घूम रहे हैं।
दस्तावेजों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ बिलासपुर के कोटा और मस्तूरी ब्लाॅक में यह फर्जीवाड़ा जमकर चल रहा है। इन्हीं दो ब्लाॅकों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हथिया लेने का बड़ा मामला सामने आया है। गोंड़, भूमिया और उरांव जाति के लोगो के द्वारा फर्जी तरीके से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ उठाते हुए सरकारी नौकरी भी हथिया ली है। एक जानकारी के अनुसार फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वाले अधिकांश शिक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे हैं।
फर्जी बैगा जाति प्रमाण पत्र के सहारे शिक्षाकर्मी बनने की शिकायत पर कोटा जनपद पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए बर्खास्तगी आदेश जारी किया था|
छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले में जाति बदलने का खेल जमकर चल रहा है। दस्तावेजों पर नजर डालें तो जिन लोगों के सरकारी दस्तावेजों में बैगा अनुसूचित जनजाति दर्ज है, उनके पूर्वजों की जाति कुछ और ही लिखी हुई है। राजस्व और स्कूल रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और निर्वाचन दस्तावेजों में ढीमर ओबीसी दर्ज है। इससे भी गजब ये, कुछ ऐसे भी दस्तावेज मिले हैं जिसमें पति पत्नी की जाति अलग-अलग दर्ज है। 2011 की जनगणना के अनुसार विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की आबादी 89 हजार 744 है। 1949 से पहले कुछ ढीमर समुदाय के लोग बैगा लिखा करते थे।
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने बताया, वर्ष 2015-16 में बैगा जनजाति के सर्वे से साफ है, छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र में बैगा समुदाय निवासरत नहीं है। विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय मंत्री ने एक सवाल के जवाब में यह बताया है, मस्तूरी क्षेत्र में बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग निवासरत नहीं हैं। अचरज की बात ये, सरकारी दस्तावेजों को झूठलाते हुए इस क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक लोगों ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया है। अधिकांश मामले ढीमर और धीवर समाज से जुड़े लोगों के पाए गए, जो बैगा के बजाय ओबीसी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
कोटा ब्लाॅक के तहसील बेलगहना के आस-पास के ग्राम पंचायतों (बहेरामुड़ा लुफा दालसागर (कुपाबांध) बासाझाल अखराडॉड, लठौरी, चॉटीड़ाड, करहीकछार, लठौरी, छुईहा, चूनाखोदरा (कुरदर), लमनाझार, खसरियापारा, गोंड़पारा (कंचनपुर), टांटीधार, चिखलाडबरी, खैरझिटी, बानाबेल, उपका, चॉटीड़ॉड, बैगापारा (लूफा), मझगाँव, औरापानी, कोरीपारा, सौंतापारा, मीनी मोहल्ला करवा, पहन्दा, दवनपुर, बारीडीह) ।
कमिश्नर बिलासपुर संभाग सुनील कुमार जैन का कहना है, कुछ ब्लाकों में फर्जी बैगा प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के प्रकरण पर शिकायत सामने आए हैं। संबंधित विभागों को पत्र भेज दिया गया है और जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 19 प्रकरणों की समीक्षा एवं सुनवाई की गई, इसमें 07 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गये एवं 12 प्रकरण विचारार्थ प्रस्तुत किये गए। सुनवाई लिए रखे गए कुल 07 प्रकरणों में से 04 प्रकरणों पर सुनवाई पूरी कर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए, 02 प्रकरणों पर पुनः अवसर प्रदान करने एवं 01 प्रकरण पर सोशल स्टेटस प्रस्तुत करने के लिए विजिलेंस टीम को निर्देशित किया गया।
सर्व आदिवासी समाज ने दस्तावेजी प्रमाण के साथ कलेक्टर जीपीएम से लेकर हाई पावर स्क्रूटनी समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत पर नजर डालें तो एक और बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है, ऐश्वर्य बैगा का प्रमाण पत्र इमलीपारा बिलासपुर से बना है। ये सरकारी दस्तावेज सीधेतौर पर प्रमाणित करता है। एश्वर्य के बच्चों का गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के साल्हेघोरी से व बहन का अलग पंचायत से।
ग्राम पोंडी, सीपत तहसील मस्तूरी विकासखंड जिला बिलासपुर के अंतर्गत आता है, इन सभी का जाति प्रमाण पत्र अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मस्तूरी से जारी होना चाहिए, जबकि फर्जी जाति प्रमाण पत्र अस्थायी तौर पर पहले ग्राम एवं निवासी इमलीपारा कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बिलासपुर से और बच्चो का वर्तमान मे धनौली, सालहेघोरी, डाहिबाहरा ग्राम पंचायत् से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पेंड्रारोड, जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही से जारी हुआ है।
राष्ट्रीय समन्वयक एवं प्रभारी (म.प्र.) अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस दिल्ली, पूर्व सदस्य राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, छत्तीसगढ़ ने कलेक्टर गौरेला, पेंड्रा मरवाही को पत्र लिखकर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अर्चना पोर्ते ने पत्र में लिखा है, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से विशेष पिछडी जनजाति बैगा का कूट रचित दस्तावेजों के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर शासकीय सेवा का लाभ ले रहे है, ऐसे लोगों के प्रमाण पत्र का राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
0 पढ़िए पत्र में क्या लिखा है?
नागा बैगा जनशक्ति संगठन के अध्यक्ष,सचिव राम सिंह बैगा एवं जेठू राम बैगा तथा प्रेमलाल बैगा जिलाध्यक्ष बैगा समाज जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (छ.ग.) एवं अन्य बैगा समाज के पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से लगभग 55 व्यक्तियों द्वारा ग्राम पोड़ी थाना सीपत वि.खं. मस्तूरी, जिला बिलासपुर छ.ग. में अन्य जातियों के व्यक्तियों द्वारा पूर्व मे जिला बिलासपुर एवं वर्तमान में जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का कूट रचित दस्तावेज के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर शासकीय सेवा का लाभ ले रहे है की सूची संहित शिकायत किया गया था, जिसपर कार्यवाही आज दिनांक तक नही हो पाया है। जबकि कूट रचित दस्तावेज द्वारा जाति प्रमाण पत्र जो बनवाये थे उनका वर्तमान में जी.पी.एम. के बैगा ग्राम के नहीं है, इनका रोटी बेटी का संबंध है और ना ही उनके पूर्वज इस स्थान पर पूर्व मे निवासरत थे।