बिजली कंपनी की डिजिटल व्यवस्था पर भी दलालों की नजर, उपभोक्ता हो रहे परेशान
रायपुर। राज्य सरकार जितना जनता को सुविधाएं देने का प्रयास करती है, उतना ही आगे बढ़ कर दलाल इसमें अपने फायदे का तरीका ढूंढ लेते हैं। विद्युत वितरण कंपनी का सिस्टम भी इसी का शिकार हो गया है। कहने को तो ऑनलाइन सिस्टम के जरिए आम जनता खुद ही नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकती है और सभी काम स्वत: होंगे, मगर इसमें दिखी कमजोरी का लाभ उठा कर दलालों ने अपना कारोबार शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि इसमें फाइनल अनुमोदन की ठोस व्यवस्था नहीं होने और पारदर्शिता में कमी का लाभ सीधा दलाल उठा रहे हैं। इस सिस्टम पर दलाल और फर्जी तरीके से काम कर रहे ऑपरेटरों ने कब्जा जमा लिया है। उपभोक्ता की जगह यही नए सिस्टम में काम कर रहे हैं। यही लोग ही पूरी प्रक्रिया कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को झांसा दे रहे हैं।
बिजली कंपनी के ऑफिसों में आम शिकायत थी कि नए कनेक्शन के लिए हर किसी को चक्कर काटना पड़ता है और साथ ही अवैध वसूली की जा रही है। कंपनी को लगा कि नए सिस्टम से जनता को राहत मिल जाएगी, मगर हालात वैसे ही बने हुए हैं। अब दलाल ही उपभोक्ता बन कर पूरी प्रक्रिया कर रहे हैं और डिमांड नोट जारी होते ही उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं। यह भी बात आ रही है कि दलाल उपभोक्ताओं को ऑफिस तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं, यह झांसा देते हैं कि सब ऑनलाइन हो जाएगा।
बिलासपुर में पश्चिम डिवीजन के गोल बाजार जोन में ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। बताया जाता है कि एक मीटर रीडर ने उपभोक्ता से कनेक्शन लेने का ठेका ले लिया। इसके बाद सीधे ऑनलाइन पंच करके बिना डिवीजनल मंजूरी के ही 25 किलोवाट का भारी-भरकम कनेक्शन के लिए आवेदन करवा दिया, बल्कि डिमांड नोट निकालकर पैसे का भुगतान तक करवा दिया है। फिर वहां पर कनेक्शन भी लग गया। जानकारों का कहना है कि ज्यादा लोड के कनेक्शन के लिए पहले डिवीजन ऑफिस से स्वीकृति ली जाती है। नए सिस्टम में इसका भी उल्लंघन हो रहा है।
ऑनलाइन सिस्टम का ही फायदा उठा कर दलाल किस्म के लोगों ने बिलासपुर के ही नेहरू नगर जोन के अमन विहार में एक उपभोक्ता को बिजली पोल से घर की दूरी 52 मीटर होने के बाद भी स्थाई कनेक्शन दे दिया, जबकि यह नियम के विरुद्ध है। उपभोक्ता को इससे पहले अस्थाई कनेक्शन दिया गया था। अब दलालों ने वहां पर नया स्मार्ट मीटर तक लगवा दिया है। इसके लिए उपभोक्ता से अधिक रुपये तक लिए जाने की खबर है। इतना ही नहीं, बड़े बिल्डरों के यहां भी सिस्टम को ताक में रख कर सामान्य कनेक्शन बता कर मीटर लगवा दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नए सिस्टम में उपभोक्ता भले ही ऑनलाइन फॉर्म भरे और दस्तावेज अपलोड करे, लेकिन डिमांड नोट (पैसे जमा करने का आदेश) तब तक जारी नहीं होना चाहिए जब तक कि संबंधित क्षेत्र के जेई (जूनियर इंजीनियर) या एई (असिस्टेंट इंजीनियर) अपने लॉगिन आईडी से दस्तावेजों और मौके का भौतिक सत्यापन कर फाइनल अप्रूवल न दे।
दूसरी ओर बिलासपुर के कार्यपालक निदेशक एके अम्बस्ट का कहना है कि सिस्टम में उपभोक्ता को खुद ही प्रोसेस करना होगा। उसके बाद ही उन्हें डिमांड मिलेगा। साथ ही मीटर जारी करने से पहले संबंधित सहायक यंत्री को उसकी जांच करनी है, अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो वहां का एई ही जिम्मेदार माना जाएगा। एई चाहे तो आवेदन को निरस्त भी कर सकता है।