दाल मिल को राहत, 26 साल पुराने शुल्क की वसूली पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक…
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के दाल और अनाज मिल संचालकों को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राज्य शासन द्वारा बाहर से आने वाले अनाजों पर बीते 26 साल का बकाया निराश्रित शुल्क (0.2 प्रतिशत) एक साथ वसूलने के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए शासन के इस नोटिफिकेशन को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया है। हाई कोर्ट ने राज्य शासन और मंडी बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
छत्तीसगढ़ शासन ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी कर सभी दाल और अनाज मिलों को एक नवंबर 2000 से अब तक का बकाया 0.2 प्रतिशत निराश्रित शुल्क एकमुश्त जमा करने का आदेश दिया था। आदेश में मिल संचालकों को स्व-आकलन कर राशि मंडी बोर्ड के पास जमा करने को कहा गया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि शुल्क जमा नहीं किया गया, तो उनके मिलिंग लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे। बता दें कि यह निराश्रित शुल्क समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत गरीब और असहाय वर्ग की सहायता के लिए लिया जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से राज्य शासन ने बाहर से आयात होने वाले अनाज, दलहन और तिलहन पर इस शुल्क से छूट दे रखी थी। लेकिन वर्ष 2026 में अचानक बीते 26 वर्षों का टैक्स एक साथ जमा करने का नोटिस थमा देने से उद्योग जगत में हड़कंप मच गया था।
रायपुर दाल मिल एसोसिएशन के अधिवक्ता अमन सक्सेना ने कोर्ट को बताया, छत्तीसगढ़ निराश्रित एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम 1970 के अनुसार, यह शुल्क कृषि उपज मंडी अधिनियम के तहत मंडी फीस लेते समय ही वसूला जा सकता है। 26 साल तक छूट देने के बाद अचानक भूतलक्षी प्रभाव से एकमुश्त वसूली का नया आदेश जारी करना पूरी तरह से अनुचित और अवैधानिक है।
राज्य शासन के इस आदेश के खिलाफ ‘रायपुर दाल मिल एसोसिएशन’ ने 400 मिल संचालकों की ओर से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। एसोसिएशन की ओर से एडवोकेट अमन सक्सेना ने पैरवी की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता तर्कों को सुनने के बाद राज्य शासन के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए फैसले से बाधित रखा है।