कोयला लेवी केस में बड़ी राहत, हाईकोर्ट से निराशा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नारायण साहू को दी जमानत
दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाला में आरोपी नारायण साहू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। नारायण साहू, जिसे मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर और कोयला लेवी वसूली सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य माना गया है, को शीर्ष अदालत ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें, इसी मामले में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने मई 2026 में जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को नारायण साहू की पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और उसने जांच से बचने की कोशिश की।
ट्रायल में देरी के लिए आरोपी का आचरण जिम्मेदार है। आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, इसलिए इसमें जमानत का रुख सख्त होना चाहिए। प्रथम दृष्टया साक्ष्य और केस डायरी आरोपी की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए नारायण साहू ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका SLP दायर की थी। 15 जुलाई 2026 को सीजेआई, जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार के वकील ने स्वीकार किया कि इस मामले में सूर्यकांत तिवारी समेत अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, चूंकि ट्रायल पूरा होने में अभी समय लगेगा, इसलिए आरोपी को अनिश्चित काल तक न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नारायण साहू को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड भरने होंगे। साथ ही, उसे उन सभी शर्तों और नियमों का पालन करना होगा, जो इसी मामले के सह-आरोपियों के लिए 28 जनवरी 2026 को निर्धारित किए गए थे।
ACB, EOW में दर्ज अपराध के तहत नारायण साहू पर आईपीसी की धारा 420, 120-बी, 384 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। आरोप है कि यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर प्रति टन अवैध लेवी वसूलता था। जांच में नारायण साहू को इस अवैध नकदी को सरकारी अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाने वाला एक प्रमुख कड़ी माना गया था।