फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला: चाकू दिखाकर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 साल की सजा

09_12_2022-court_demo

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरण) ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर (21 वर्ष) को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गंगा पटेल ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत कुल 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

यह मामला थाना इंदागांव क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में बताया था कि 19 मई 2025 की शाम वह अकेली नाले की ओर गई थी। इसी दौरान आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर वहां पहुंचा और उसकी गर्दन पर चाकू टिकाकर मारपीट की। आरोपी ने जान से मारने की धमकी देते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। भयभीत पीड़िता ने घर पहुंचकर पूरी घटना अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद थाना इंदागांव में तत्काल अपराध दर्ज कराया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना उपरांत उप पुलिस अधीक्षक गरिमा दादर, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विकास पाटले तथा उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार विजयवार ने जांच पूरी कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में पीड़िता सहित कुल 14 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। इसके अलावा चिकित्सा रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोपों को प्रमाणित किया गया।

सभी साक्ष्यों, पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट तथा मामले की गंभीरता पर विचार करने के बाद फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई।

न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये के अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये के अर्थदंड, तथा धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। सभी अर्थदंड मिलाकर आरोपी पर कुल 23 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों पर न्यायालय के सख्त रुख को दर्शाता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच, प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाया जा सकता है।

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