हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया: बच्चों की देखभाल का अधिकार सर्वोपरि, स्टाफ की कमी नहीं बनेगी बाधा

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के चाइल्ड केयर लीव (CCL) के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की कमी या प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर किसी पात्र महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि वैधानिक अधिकारों का पालन कराना नियोक्ता की जिम्मेदारी है और इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था भी प्रशासन को ही करनी होगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के चाइल्ड केयर लीव (CCL) के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की कमी या प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर किसी पात्र महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि वैधानिक अधिकारों का पालन कराना नियोक्ता की जिम्मेदारी है और इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था भी प्रशासन को ही करनी होगी।
हाईकोर्ट के जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने बिलासपुर सेंट्रल जेल में पदस्थ महिला वार्डर की याचिका स्वीकार करते हुए जेल प्रशासन द्वारा अवकाश आवेदन निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को सात दिनों के भीतर 60 दिनों की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत की जाए।
याचिकाकर्ता महिला वार्डर ने 10 सितंबर 2025 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों की देखभाल के लिए उन्होंने 13 अप्रैल 2026 से 11 जुलाई 2026 तक 90 दिनों की चाइल्ड केयर लीव ली थी। इसके बाद बच्चों की कम उम्र और देखभाल की आवश्यकता का हवाला देते हुए उन्होंने 60 दिनों के अतिरिक्त अवकाश के लिए आवेदन किया।
हालांकि, बिलासपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने महिला वार्डरों की कमी का कारण बताते हुए 9 जुलाई 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका में बताया गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 2010 के नियम 38-सी के तहत महिला कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में 730 दिनों तक चाइल्ड केयर लीव का अधिकार प्राप्त है। याचिकाकर्ता अब तक केवल 90 दिनों का ही लाभ ले चुकी थीं, इसलिए अतिरिक्त अवकाश की पात्र थीं।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि बिलासपुर सेंट्रल जेल में वार्डर के 106 स्वीकृत पदों में 24 पद रिक्त हैं तथा वर्तमान में केवल 13 महिला वार्डर कार्यरत हैं। ऐसे में सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से अतिरिक्त अवकाश देना संभव नहीं था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य छोटे बच्चों की देखभाल और उनके समुचित विकास के लिए मां को पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। यदि कोई कर्मचारी नियमों के तहत पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी के आधार पर उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कठिनाइयों का समाधान निकालना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि उसका खामियाजा कर्मचारी को भुगतना पड़े। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने महिला वार्डर को 60 दिनों की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश जारी कर दिया।
याचिकाकर्ता महिला वार्डर ने 10 सितंबर 2025 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों की देखभाल के लिए उन्होंने 13 अप्रैल 2026 से 11 जुलाई 2026 तक 90 दिनों की चाइल्ड केयर लीव ली थी। इसके बाद बच्चों की कम उम्र और देखभाल की आवश्यकता का हवाला देते हुए उन्होंने 60 दिनों के अतिरिक्त अवकाश के लिए आवेदन किया।
हालांकि, बिलासपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने महिला वार्डरों की कमी का कारण बताते हुए 9 जुलाई 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका में बताया गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (छुट्टी) नियम, 2010 के नियम 38-सी के तहत महिला कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में 730 दिनों तक चाइल्ड केयर लीव का अधिकार प्राप्त है। याचिकाकर्ता अब तक केवल 90 दिनों का ही लाभ ले चुकी थीं, इसलिए अतिरिक्त अवकाश की पात्र थीं।
राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि बिलासपुर सेंट्रल जेल में वार्डर के 106 स्वीकृत पदों में 24 पद रिक्त हैं तथा वर्तमान में केवल 13 महिला वार्डर कार्यरत हैं। ऐसे में सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से अतिरिक्त अवकाश देना संभव नहीं था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य छोटे बच्चों की देखभाल और उनके समुचित विकास के लिए मां को पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। यदि कोई कर्मचारी नियमों के तहत पात्र है, तो केवल स्टाफ की कमी के आधार पर उसे इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कठिनाइयों का समाधान निकालना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि उसका खामियाजा कर्मचारी को भुगतना पड़े। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने महिला वार्डर को 60 दिनों की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव देने का आदेश जारी कर दिया।