बैंक लोन फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड तमिलनाडु से गिरफ्तार, 14.5 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ बेमेतरा के इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा में साढ़े 14 करोड़ रुपये के लोन घोटाले के आरोपी विनीतदास को बेमेतरा पुलिस ने तंजावुर जिला तंजाबुर तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कर उसे ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लेकर आई है।
रज्जू पाटनवार पिता संतोष कुमार पाटनवार उम्र 39 वर्ष, शाखा प्रबंधक इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा बेमेतरा ने रिपोर्ट दर्ज कर बताया कि तत्कालीन बैंक प्रबंधक विनीत दास द्वारा आपराधिक षडयंत्र कर बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए वित्तीय अनियमितता व अवैधानिक रूप से खातों में धन राशि अंतरण कर ली है।
विनीत ने बैंक के साथ सहयोगी कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा, एवं टीकाराम माथुर के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र कर बैंक से लगभग 14 करोड़ 56 लाख 9 हजार 693 रूपये की धोखाधडी की है। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध धारा 420, 409, 120बी, 34 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया।
शुरुआती जांच पड़ताल के दौरान पुलिस ने कमलेश सिन्हा निवासी बेमेतरा, जोहन सिन्हा निवासी केवाछी जिला बेमेतरा, टीकाराम माथुर निवासी बिरमपुर थाना दाढ़ी जिला बेमेतरा, नागेश वर्मा निवासी केवांछी जिला बेमेतरा को गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज (IGP) अभिषेक शांडिल्य के निर्देश पर एसडीओपी बेमेतर भूषण एक्का के मार्गदर्शन में एक टीम गठित की गई थी।
जांच पड़ताल के दौरान आरोपी विनीतदास पिता सुप्रभातदास उम्र 40 वर्ष निवासी मकान नं. 162 के सामने अशोक नगर पो. डोरंडा थाना अरगोड़ा जिला राची झारखंड को, इंडियन ओवरसीज बैंक क्षेत्रीय कार्यालय तंजावुर तमिलनाडु से 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर ट्रांजिस्ट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया।
धोखाधड़ी की घटनाए विभिन्न कर्जदारों एवं बिचौलिये कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर के साथ आपराधिक षड्यंत्र के द्वारा किया गया है। उधारकर्ता द्वारा ऋण सुविधा के प्रयोग का विवरण एवं धोखाधड़ी का कारण निन्नानुसार सूचीबध है: कुल खाता धारक 180 TOTAL Rs. 16,01,84,785.00 बैंक के आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है।
- कुछ मामलों में, यूनिट है ही नहीं या यूनिट बंद थे।
- एसएचजी ऋण के मामले में, पहली व दूसरी डोस में बहुत उच्च राशि की स्वीकृति एवं संवितरित की गई जो कि एसएचजी के मास्टर परिपत्र का उलंघन है।
- ग्राहक के हस्ताक्षर बिना, खातों के बीच अनाधिकृत हस्तांतरण और एक एसएचजी खाते में एसएचजी पदाधिकारियों की जानकारी के बिना, अनाधिकृत नकदी निकास, जहां हस्ताक्षर मेल नहीं खाते, रिपोर्ट की गई।
- कृषि फार्म मेकानिज्म सावधि ऋण के मामले में, डीलर के खाते में स्वीकृत ऋण राशि का हस्तांतरण किया गया लेकिन सम्पत्ति उपलब्ध नहीं थी।
- कुछ मामलों में, सप्लायर का जीएसटी नंबर फर्जी थे एवं ऋण स्वीकृत करते समय शाखा द्वारा सप्लायर का क्रेडेंसियल सत्यापित नहीं किया गया।
- उधारकर्ता की पात्रता का ठीक से पता नहीं लगाया गया, केसीसी ऋणों के मामले में अधिक वित्तपोषित किया गया।
- शाखा ने केवल अनुकूलन करने के उद्देश्य से विभिन्न ऋणों की स्वीकृति की।
- कई मामलों में यह पाया गया है कि ऋण प्रक्रियाओं को बदला एवं चुराया गया है।
- कुछ मामलों में, ग्रेड के अनुसार शाखा प्रबंधक की विवेकाधीन शक्तियों का उल्लंघन किया गया है।
- कई केसीसी ऋण में, जहां जरूरत थी वहां शाखा द्वारा अनुमोदित मूल्यांकक से मूल्यांकन रिपोर्ट और कानूनी राय प्राप्त नहीं की गई। कुछ मामलों में अधिवक्ता द्वारा कानूनी राय ली गई है जो कि हमारे पैनल के अधिवक्ता नहीं है।
- केसीसी ऋण भूमि दस्तावेजों में उल्लेखित फसल पैटर्न के अनुसार स्वीकृत नहीं है जिसके परिणामस्वरूप अतिरिक्त वित्तपोषण हुआ है।
- कई सावधि ऋणों में, उधारकर्ता द्वारा पर्याप्त मार्जिन राशि का संचार नहीं किया गया।
- मत्स्य विभाग को झूठा सैद्धांतिक स्वीकृत पत्र जारी कर ऋण लेने वाले, योगेंद्र साहू और दिलीप साहू को सात सात लाख मत्स्य सावधि ऋण स्वीकृत की बात कही गई है, लेकिन शाखा ने केसीसी ऋणों में प्रत्येक को 10 लाख रुपये मजूर किए है। यूनिट मौजूद नहीं है।
- मत्स्य विभाग से ऋण स्वीकृत करने केलिए आवेदन प्राप्त हुआ, जहाँ पूंजी सब्सिडी उपलब्ध है लेकिन शाखा ने केसीसी योजना के तहत ऋण स्वीकृत किया था। शाखा द्वारा सब्सिडी का दावा नहीं किया गया। मत्स्य विभाग के साथ कोई संयुक्त निरीक्षण किया गाय।
- मत्स्य ऋण का संवितरण नकद द्वारा आहरण किया गया।
- कई केसीसी ऋण में यह पाया गया है कि उधारकर्ता के नाम पर भूमि नहीं है। भूमि धारक से उचित गारंटी नहीं ली गई है।
- केसीसी ऋण उधारकर्ता की पत्रता मानदंड के संदर्भ से अधिक वित्तपोषित है। इन ऋणों को जिले के फसल पैटर्न के अनुसार वित्तपोषित नहीं किया गया।
- विशाल एग्रो के सीसी खाते में सम्पत्ति तीसरे पक्षकार के नाम पर है लेकिन शाखा ने सीसी लिमिट स्वीकृति दी है। श्री सुरेश तिवारी द्वारा दिनांक 09.03.2020 की कानूनी राय के अनुसार, उधारकर्ता सम्पत्ति का परिचालक है। उसके पास सम्पत्ति का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। यह भी बताया गया है कि यह भूमि सरफेसी अधिनियम लागू नहीं है। भूमि रिकॉर्ड के अनुसार वह भूमि सरकारी भूमि के रूप चिन्हित है।
- सीसी खाते के लिए उधारकर्ता से स्टॉक विवरण नहीं लिया गया है और सीसी खाते के लिए शाखा सही डीपी का पता लगाने में विफल रही है।
- खातों में लेनदेन विशेषकर नकदी उधार खाते के मामले में शाखा द्वारा निगरानी नहीं की गई। उधारकर्ता द्वारा निधि का उद्देश्य से अलग प्रयोग किया गया।
जांच में यह भी पता चला है कि कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टिकाराम माथुर शाखा के बिचौलिए के रूप में काम कर रहे थे। बैंक द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का अनुपालन किए बिना बिचौलिये और तीसरे पक्षकार से मिलकर अपराधिक षड़यंत्र द्वारा अंधाधुंध ऋण देकर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी एवं बैंक के सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है। तीसरे पक्ष के साथ मिलकर बैंक के साथ आपराधिक दुर्विनियोजन, अपराधिक विश्वासघात, अपराधिक षड़यंत्र, बेईमानी तथा बैंकिंग दस्तावेजों के साथ जालसाजी किया है जिसके फलस्वरूप शिकायतकर्ता बैंक का रु. 145609693.01/- रूपये की हानि हुई है।