रेलवे जोन की आय करोड़ों में, अस्पतालों की दुर्दशा पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के जोनल मुख्यालय बिलासपुर स्थित सेंट्रल रेलवे अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश के सर्वाधिक राजस्व अर्जित करने वाले रेलवे जोन के इस अस्पताल में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव और डॉक्टरों की कमी को गंभीर मानते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रेलवे प्रशासन से जवाब तलब किया है।
मीडिया में प्रकाशित खबरों का स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील संस्था में बुनियादी सुविधाओं का ठप होना और पर्याप्त चिकित्सकों का उपलब्ध नहीं होना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हाल ही में सेंट्रल रेलवे अस्पताल में लगातार दो दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। बैकअप जनरेटर भी काम नहीं कर रहा था, जिससे बिजली और पानी का संकट पैदा हो गया। इसका सीधा असर अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा।
बिलासपुर स्थित यह जोनल रेलवे अस्पताल केवल बिलासपुर और रायपुर मंडल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के नागपुर और मध्यप्रदेश के शहडोल रेल मंडल के कर्मचारियों, उनके परिवारों और बड़ी संख्या में पेंशनरों के उपचार का प्रमुख केंद्र है। इसके बावजूद अस्पताल में स्थायी डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है और अधिकांश व्यवस्था संविदा चिकित्सकों के भरोसे संचालित हो रही है। गंभीर मरीजों को कई बार निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
डिवीजन बेंच ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है। अदालत जानना चाहती है कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, अस्पताल में बिजली-पानी संकट क्यों उत्पन्न हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या स्थायी व्यवस्था की गई है।
मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब रेलवे प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।