सूदखोरी पर सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला, 15 साल पहले किसान की हड़पी जमीन की रजिस्ट्री शून्य

राजनादगांव। राजनादगांव जिले के डोंगरगांव के सूदखोरों द्वारा फर्जी रजिस्ट्री के जरिए किसानों की जमीन हड़प ली थी। डोंगरगांव के एसडीएम अनिकेत साहू ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। किसानों को राहत देते हुए सूदखाेरों द्वारा कराई गई फर्जी रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया है। इस मामले में सूदखोरों से परेशान किसान को 15 साल बाद न्याय मिला है।
वर्ष 2008-09 में डोंगरगांव क्षेत्र के लगभग दर्जन भर किसानों ने ब्याज पर रकम लिया था। जिसके बाद रुपए की अदायगी भी कर दी थी। रुपये वसूलने के बाद सूदखोरों ने फर्जी तरीके से वर्ष 2011 में धोखाधड़ी करते हुए किसानों की जमीन रजिस्ट्री करा ली। धोखाधड़ी के जरिए फर्जी रजिस्ट्री कराने की जानकारी जब किसानों को मिली तब, परेशान किसानों ने न्यायालय की शरण ली। मामला लंबा चलने के कारण इस दोरान कुछ किसानों के पिता की मृत्यु भी हो गई। पिता की मृत्यु के बाद कानूनी अधिकारों को इस्तेमाल करते हुए पुत्रों ने मुकदमा लड़ने का निर्णय लिया। वर्ष 2014 में इसकी शिकायत तहसील स्तर पर की गई। इसके बाद मामला एसडीएम न्यायालय और फिर जिला कलेक्टर तक पहुंचा। इसके बाद लगभग 2 वर्ष तक सिविल न्यायालय में मामला चला और वर्ष 2023 में वापस डोंगरगांव राजस्व न्यायालय में प्रकरण भेजा गया।
मामले में सुनवाई और प्रक्रिया के दौरान किसानों को 96 पेशी मिल चुकी थी। फैसले में हो रहे विलंब से किसान हताश और परेशान हो गए थे। मामला सिविल न्यायालय में चला, इसके बाद सुनवाई एसडीएम कोर्ट में हुई और एक फरियादी के पक्ष में अब फैसला आने से अन्य किसानों में भी न्याय मिलने की आस जग गई है। बता दें, 11 किसानों के प्रकरण कोर्ट चल रहा है।
डोंगरगांव एसडीएम कोर्ट ने अपने फैसला में कहा है, भूमि हड़पने संबंधी कुचक्रों से मुक्ति अधिनियम 1976 की धारा 7 (ii) के तहत कुमरदा तहसील क्षेत्र के ग्राम बंशीबंजारी स्थित वाद भूमि खसरा नंबर 53 एवं 507/1 को लेकर 19 अप्रैल वर्ष 2011 को की गई रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दिया गया है।कोर्ट ने हल्का पटवारी को उक्त वाद भूमि स्व. तोरण लाल नांदेश्वर के वारिसानों के नाम पर पुनः राजस्व अभिलेख दुरूस्त करने निर्देशित किया गया है।
राजधानी रायपुर से लेकर बिलासपुर, कोरबा, राजनादगांव सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सूदेखाेरों का आंतक है। जरुरतमंदों को औने-पौने और भारी भरकम ब्याज पर रकम देने के बाद बेहिसाब पैसे वसूलते हैं। आलम ये मूलधन और ब्याज की राशि चुकता करने के बाद भी देनदारों को परेशान करते हैं और जबरिया दबाव बनाकर बेजा वसूली भी करते हैं। बिलासपुर,कोरबा सहित प्रदेशभर में सूदखोरों के दबाव के चलते आत्महत्या के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। राजनांदगाव जिला प्रशासन का यह फैसला प्रदेशभर के लिए नजीर बनेगा। जाहिर है अगर इसी तरह के फैसले अन्य जिलों से आने लगे और प्रशासन सचत हो जाए तो सूदखोरों की कमर टूट जाएगी और कानूनी शिकंजा भी कसेगा।