वन विभाग में नई नियुक्तियां, 5 प्रशिक्षु IFS अधिकारियों को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के जंगलों की कमान अब नई पीढ़ी के अफसरों के हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वर्ष 2024 बैच के पांच भारतीय वन सेवा (IFS) प्रशिक्षु अधिकारियों को क्षेत्रीय प्रशिक्षण के लिए उप वनमंडलाधिकारी (SDO Forest) के पद पर अस्थायी रूप से तैनात कर दिया है। शासन का मानना है कि जमीनी अनुभव ही भविष्य के वन अधिकारियों को बेहतर प्रशासक बनाएगा। इसके लिए सरगुजा से लेकर बस्तर तक अलग-अलग वन क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आदेश पर विभाग के विशेष सचिव जे.पी. पाठक के हस्ताक्षर हैं। आदेश के तहत प्रशिक्षु अधिकारियों को मुख्यालय से निकालकर सीधे फील्ड में भेजा गया है, ताकि वे वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकें।

आदेश के मुताबिक, प्रशिक्षु IFS अधिकारी कुनाल मिश्रा को सरगुजा के अम्बिकापुर वनमंडल, मृगजा जालिंदर यादव को कटघोरा वनमंडल, परख सारडा को सुकमा वनमंडल, प्रीति यादव को उत्तर नारायणपुर वनमंडल और यशस्वी मौर्या को राजनांदगांव वनमंडल में उप वनमंडलाधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है। सभी अधिकारी अब तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, नवा रायपुर में प्रशिक्षु के रूप में पदस्थ थे।

सरकार ने नक्सल प्रभावित और संवेदनशील वन क्षेत्रों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया है। सुकमा और उत्तर नारायणपुर जैसे इलाकों में प्रशिक्षु अधिकारियों की तैनाती से साफ संकेत है कि नए IFS अधिकारियों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने का अनुभव दिया जाएगा। इससे उन्हें वन संरक्षण के साथ सुरक्षा और जनसहभागिता की भी व्यावहारिक समझ मिलेगी।

शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उप वनमंडलों में प्रशिक्षु अधिकारी भेजे गए हैं, वहां पहले से पदस्थ राज्य वन सेवा (SFS) के उप वनमंडलाधिकारी हटाए नहीं जाएंगे। उन्हें प्रशिक्षण अवधि तक विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के रूप में कार्य करना होगा। यानी नए अधिकारियों को अनुभवी अफसरों का मार्गदर्शन भी मिलता रहेगा।

विभाग ने आदेश में साफ किया है कि प्रशिक्षु IFS अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वर्तमान राज्य वन सेवा अधिकारियों को फिर उसी उप वनमंडल में पहले की तरह पदस्थ माना जाएगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी और प्रशिक्षण भी सुचारु रूप से चलता रहेगा।

वन विभाग की यह कवायद केवल औपचारिक पदस्थापना नहीं मानी जा रही है। आने वाले समय में यही अधिकारी प्रदेश के बड़े वनमंडलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में शुरुआती दौर से ही उन्हें वन संरक्षण, अवैध कटाई रोकने, वन्यजीव प्रबंधन, स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय और विभागीय प्रशासन का व्यावहारिक अनुभव दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य साफ है- किताबी ज्ञान के साथ मैदान का अनुभव भी उतना ही मजबूत हो, ताकि भविष्य में प्रदेश के जंगलों की कमान सक्षम हाथों में रहे।

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