देश में आरक्षण विवाद ने पकड़ा तूल, लखनऊ से नागपुर तक विरोध प्रदर्शन; भाजपा को वोट न देने की अपील

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नई दिल्ली: देश भर में जातिगत आरक्षण के खिलाफ विरोध के सुर तेज हो गए हैं। यूजीसी के 2026 नियमों पर हुए विवाद से उठी यह आग अब देश के कोने-कोने में भड़क गई है। इस आग को हवा देने का काम किया है हाल ही में हुए CJP प्रोटेस्ट ने। कॉकरोच जनता पार्टी की मुहिम पर पेपर लीक आंदोलन में मिली सफलता के बाद अब रिजर्वेशन को हटाने को लेकर भी मांग तेज हो गई है। इंटरनेट से शुरू हुआ यह आंदोलन सड़कों तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र के नागपुर, राजस्थान के जयपुर, यूपी के लखनऊ और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल दिया है।

बता दें कि इससे पहले CJP की तर्ज पर सोशल मीडिया पर आरक्षण के खिलाफ ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA) नाम का एक अभियान शुरू किया गया था। इस पेज के इंस्टाग्राम पर 59 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। RHA ने सरकार के सामने 5 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें जातिगत कोटा हटाकर केवल आय के आधार पर आरक्षण दिए जाने की मांग शामिल है। इसके अलावा मांग है कि एक परिवार को आरक्षण का लाभ केवल एक ही बार मिले। इसके अलावा सभी वर्गों के लिए एक न्यूनतम क्वालीफाइंग मार्क्स तय करने और आरक्षित वर्ग की खाली बची सीटें जनरल कैटेगरी को ट्रांसफर करने की भी मांग की गई है।

इन मांगों को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं। बीते 30 जुलाई को नागपुर में RHA के बैनर तले हजारों युवाओं ने रैली निकालकर देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत की। इसके बाद लखनऊ के शहीद स्मारक और हजरतगंज में ‘सवर्ण मोर्चा’ और ‘स्वर्ण समाज’ के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। विशाखापत्तनम में भी इस तरह के प्रदर्शन हुए हैं।

सबसे बड़ा प्रदर्शन राजस्थान में हुआ है। यहां राजधानी जयपुर में श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में 24 दिनों की 800 किलोमीटर लंबी यात्रा के बाद हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी दफ्तर और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल कर उन्हें रोक दिया।

इस बीच मकराना ने पुलिस कार्रवाई में एक प्रदर्शनकारी की मौत का आरोप लगाते हुए अपने समर्थकों के साथ भाजपा को वोट न देने की कसम खाई है। उन्होंने कहा कि वे आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में बीजेपी को वोट नहीं देंगे। करणी सेना ने यूजीसी नियमों की वापसी, पंचायत चुनावों में EWS आरक्षण और जातिगत कानूनों की समीक्षा की मांग को लेकर 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए ‘राजस्थान बंद’ की धमकी दी है।

इस बीच इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीवी डिबेट में आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाकर रातों-रात चर्चित हुए छात्र हर्ष दुबे दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी में हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी तक प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति नहीं दी है।

दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस आंदोलन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने पिछले सप्ताह एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “आरक्षण पर कुछ लोग सोची-समझी साजिश के तहत झूठ फैला रहे हैं। आरक्षण कोई खैरात नहीं, सदियों से शोषित वर्गों के प्रतिनिधित्व का संवैधानिक अधिकार है। ‘सुधार’ के नाम पर जो नफरत फैलाई जा रही है, वह देश के सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है। ।”

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