14 साल बाद रिटायर्ड कर्मचारी जारी किया वसूली आदेश, वन विभाग का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त

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बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने रिटायरमेंट के बाद पुराने मामले में लाखों रुपये की वसूली करने वन विभाग द्वारा जारी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। नारायणपुर वन मंडल के सेवानिवृत्त रेंजर बीरभद्र देवांगन से वर्ष 2010-11 के सागौन पौधारोपण से जुड़े मामले में 4,88,891 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया था। हाई कोर्ट ने इस आदेश को कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया।

कोर्ट ने वन विभाग को निर्देश जारी करते हुए कहा है, वसूली की राशि याचिकाकर्ता के पेंशन या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से काटी या रोकी गई है तो उसे, आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह माह के भीतर वापस किया जाए।

बीरभद्र देवांगन 31 जुलाई 2022 को रेंजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के तकरीबन दो वर्ष बाद पांच अगस्त 2024 को वन विभाग ने नोटिस जारी कर, वर्ष 2010-11 में नारायणपुर सर्कल में उनके कार्यकाल के दौरान कराए गए सागौन पौधारोपण के असफल होने से शासन को आर्थिक नुकसान होने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता ने नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन विभाग ने उनके जवाब को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद आठ अप्रैल 2025 को विभाग ने 4,88,891 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया। 

वन विभाग द्वारा जारी रिकवरी आदेश को चुनौती देते हुए बीरभद्र देवांगन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका के अनुसार सेवाकाल में इस नुकसान को लेकर कोई विभागीय जांच नहीं की गई थी। सेवानिवृत्ति के बाद करीब 15 वर्ष पुराने मामले को आधार बनाकर वसूली की कार्रवाई की गई। वह तृतीय श्रेणी कर्मचारी के रूप में सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उनके विरुद्ध किसी धोखाधड़ी या गलत तरीके से लाभ लेने का आरोप नहीं है।

याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने वन विभाग के आठ अप्रैल 2025 के वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की वसूली के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांतों का पालन आवश्यक है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है, यदि विवादित वसूली आदेश के आधार पर याचिकाकर्ता के पेंशन अथवा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से कोई राशि काटी या रोकी गई है तो उसे आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह माह के भीतर वापस किया जाए।