शपथ पत्र में बैंक खाता नहीं बताने का आरोप, सरोज पांडेय के बैंक रिकॉर्ड तलब करने की मांग

बिलासपुर। वर्ष 2018 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद सरोज पांडेय के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर मंगलवार को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता लेखराम साहू की ओर से बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 के तहत आवेदन पेश कर सरोज पांडेय के बैंक खाते से संबंधित जानकारी कोर्ट के माध्यम से हासिल करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल नामांकन के साथ प्रस्तुत शपथ पत्र में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक बैंक खाते की जानकारी छिपाई गई थी। इस आरोप को साबित करने के लिए बैंक से संबंधित दस्तावेज हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले में पिछली सुनवाई के दौरान सरोज पांडेय की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि वह अपनी ओर से कोई गवाह प्रस्तुत नहीं करेंगी। इसके बाद चुनाव याचिका में उनकी ओर से साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया समाप्त कर दी गई।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि सरोज पांडे यस्वयं गवाह के रूप में उपस्थित होने से इंकार कर चुकी हैं। ऐसे में उनके प्रति-परीक्षण के जरिए कथित बैंक खाते से संबंधित जानकारी हासिल करने का अवसर भी उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से पहले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर को गवाह के रूप में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि बैंक अधिकारी ने संबंधित खाते की जानकारी को तीसरे पक्ष से जुड़ी सूचना बताते हुए उसे उपलब्ध नहीं कराया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जवाब में भी बैंक खाते के अस्तित्व से स्पष्ट रूप से इंकार नहीं किया गया है। इसलिए अब न्यायालय के आदेश के माध्यम से बैंक से संबंधित अभिलेख प्राप्त करना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और सुदीप वर्मा ने दलील दी कि बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 की धारा 6 के तहत न्यायालय को अधिकार है कि वह संबंधित बैंक को आवश्यक बैंक रिकॉर्ड या जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दे।
उन्होंने कहा कि बैंक खाते की जानकारी चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए महत्वपूर्ण है। चूंकि सरोज पांडेय स्वयं गवाही देने से इंकार कर चुकी हैं, इसलिए न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना यह साक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।
सुनवाई के दौरान सरोज पांडेय की ओर से अधिवक्ता अविनाश चंद्र साहू ने आवेदन का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। हाई कोर्ट ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है।