नाहटा ग्रुप पर ED का शिकंजा, राजनांदगांव में वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही टीम

राजनांदगांव : राजनांदगांव में गुरूवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अचानक कार्रवाई से कारोबारी हलकों में हड़कंप मच गया। शहर से लगे तीन अलग-अलग ठिकानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमों ने एक साथ दबिश दी। कार्रवाई सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई। रायपुर और भोपाल से पहुंची अलग-अलग टीमों ने परिसरों में जांच शुरू की।
जानकारी के मुताबिक कार्रवाई भंसाली किराए भंडार और सत्यम विहार स्थित नाहटा ग्रुप से जुड़े प्रतिष्ठानों समेत तीन ठिकानों पर चल रही है। ईडी की टीमों ने परिसर में पहुंचते ही दस्तावेजों और कारोबारी गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। अचानक हुई कार्रवाई से आसपास के लोगों में भी चर्चा तेज हो गई।
जांच टीमों का फोकस दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड पर बताया जा रहा है। कारोबारी खातों, लेनदेन और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि एजेंसी को किस खास लेनदेन या मामले से जुड़े दस्तावेजों की तलाश है। आधिकारिक तौर पर कार्रवाई के कारण की पुष्टि नहीं हुई है।
कार्रवाई के लिए अलग-अलग स्थानों से टीमें राजनांदगांव पहुंचीं। रायपुर और भोपाल से आई टीमों ने अलग-अलग परिसरों को जांच के दायरे में लिया। इससे संकेत है कि कार्रवाई पहले से तैयार योजना के तहत की गई है। हालांकि जांच किस केस या पुराने प्रकरण से जुड़ी है, इसका खुलासा एजेंसी की ओर से नहीं किया गया है।
ईडी की कार्रवाई के दौरान सभी संबंधित परिसरों के बाहर स्थानीय पुलिस बल भी तैनात किया गया है। जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। अधिकारी अंदर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। कार्रवाई लंबी चलने की संभावना के बीच कारोबारी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कार्रवाई में नाहटा ग्रुप से जुड़े प्रतिष्ठानों का नाम सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। एजेंसी किन कारोबारियों या संस्थानों के बीच वित्तीय कड़ियों को तलाश रही है, यह अभी सामने नहीं आया है। ईडी की जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई के पीछे की असली वजह स्पष्ट होगी।
फिलहाल तीनों ठिकानों पर जांच जारी है। ईडी की ओर से न तो किसी गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है और न ही कार्रवाई से जुड़े मामले का आधिकारिक विवरण सामने आया है। ऐसे में अभी हर दावा जांच के नतीजे पर निर्भर करेगा। दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि एजेंसी को क्या मिला और कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है।