छात्र को प्रदर्शन में शामिल होने पर नोटिस देना पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

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नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए छात्रों को कथित तौर पर प्रोत्साहित करने वाले लॉ स्टूडेंट को शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, तो इसके बावजूद मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया।

हालांकि ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने बाद में नोटिस वापस ले लिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मामला माना। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।

बुधवार, 9 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से दूसरे वर्ष के लॉ स्टूडेंट के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत जारी नोटिस पर सवाल उठाए।

CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब अदालत ने स्पष्ट रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी, तो कोई मजिस्ट्रेट उसके विपरीत आदेश कैसे जारी कर सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किसी भी अधिकारी द्वारा नहीं किया जा सकता।

यह मामला सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने मौखिक रूप से उठाया। उन्होंने बताया कि नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दूसरे वर्ष के छात्र को नोटिस जारी किया था। बाद में मीडिया में खबर आने के बाद नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी सामने आई।

सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि यह मामला छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा करने वाला है। उन्होंने कहा कि नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के मन में भय पैदा नहीं कर सकते और इस तरह की कार्रवाई प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना का मामला हो सकती है।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया कि जब नोटिस वापस लिया जा चुका है, तो अब कार्रवाई का आधार क्या रह जाता है। इस पर वकील ने कहा कि यदि अदालत के आदेश की अवमानना हो चुकी है, तो केवल नोटिस वापस लेने से मामला समाप्त नहीं हो जाता।

CJI सूर्यकांत ने वकील से कहा कि नोटिस को औपचारिक याचिका के माध्यम से रिकॉर्ड पर लाया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट III की अदालत ने लॉ स्टूडेंट अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ BNSS की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी।

पुलिस ने आरोप लगाया था कि त्रिपाठी यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच सरकार विरोधी और कथित तौर पर गुमराह करने वाली बातें फैला रहे थे। साथ ही उन पर छात्रों को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया गया।

4 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में इन्हीं आरोपों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के बाद इस नोटिस को लेकर अदालत में गंभीर सवाल उठे हैं।

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