सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को अब रोज लेनी होंगी 2 क्लास, क्लासरूम को दफ्तर बनाने पर भी रोक

छत्तीसगढ़। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब प्राचार्यों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ कक्षा में भी पढ़ाना होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी प्राचार्यों के लिए हर दिन दो क्लास लेना अनिवार्य कर दिया है। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों की कमी दूर करने के साथ स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था और अनुशासन को बेहतर बनाया जा सकेगा।
विभाग के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ने देना है। प्राचार्यों के नियमित रूप से कक्षाएं लेने से विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही प्राचार्यों की मौजूदगी सीधे तौर पर शिक्षण व्यवस्था से जुड़ी रहेगी।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने हाल ही में प्रदेश के कई जिलों के सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कुछ स्कूलों में प्राचार्यों के चैंबर कक्षाओं से भी बड़े पाए गए। स्कूलों की इस व्यवस्था पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी।
इसके बाद हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों और प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि स्कूलों में सबसे पहली प्राथमिकता बच्चों की पढ़ाई होनी चाहिए। इसी के बाद प्राचार्यों को प्रतिदिन दो कक्षाएं लेने का निर्णय लिया गया है।
नए निर्देशों के तहत स्कूल के हर कर्मचारी के बैठने की जगह भी तय की जाएगी। लिपिक और अन्य सहायक कर्मचारियों के लिए भवन के नक्शे के अनुसार कमरे निर्धारित किए जाएंगे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी क्लासरूम को कार्यालय या प्रशासनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। बड़े और बेहतर कमरों का उपयोग विद्यार्थियों के पठन-पाठन के लिए ही किया जाएगा।
इस व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है। प्राचार्यों के कक्षा लेने से विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों का लाभ मिलेगा और शिक्षकों की कमी की समस्या भी कुछ हद तक कम होगी। वहीं, क्लासरूम को दफ्तर बनाने की व्यवस्था खत्म होने से विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त और बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने नए निर्देश प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को भेज दिए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के पालन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूल और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।