नगरीय प्रशासन में न्यायालयीन मामलों की अनदेखी, 99 प्रकरणों में जवाबदावा लंबित; अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

रायपुर : छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में न्यायालयीन मामलों की निगरानी को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। बिलासपुर हाई कोर्ट में लंबित प्रकरणों में शासन का पक्ष रखने के लिए प्रभारी अधिकारी (OIC) नियुक्त किए जाने के बावजूद कई मामलों में समय पर जवाबदावा पेश नहीं किया गया।
संचालनालय के रिकॉर्ड के अनुसार, 24 अगस्त 2026 तक केवल रायपुर और दुर्ग संभाग में 99 ऐसे प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें जवाबदावा लंबित है। इनमें रायपुर संभाग के 51 और दुर्ग संभाग के 48 मामले शामिल हैं।
इन प्रकरणों में अतिक्रमण, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति, कर्मचारियों के नियमितीकरण, परिसीमन, अविश्वास प्रस्ताव, ठेका भुगतान, संपत्ति कर, मोबाइल टावर शुल्क और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे मामले शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे विवाद हैं, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों, कर्मचारियों और नगरीय निकायों के आर्थिक हितों से है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य ने प्रदेश के संयुक्त संचालकों, नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। सभी लंबित न्यायालयीन प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर जवाबदावा तैयार कर हाई कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति के बावजूद लंबे समय तक जवाबदावा लंबित रखना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं है। संबंधित अधिकारी को जवाबदावा न्यायालय में पेश करने के साथ उसकी प्रति शासन और संचालनालय को भी उपलब्ध करानी होगी।
संचालनालय ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं करने वाले प्रभारी अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जाएगा। किसी मामले में न्यायालय द्वारा हर्जाना, खर्च अथवा कोई प्रतिकूल आदेश पारित होने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
लंबित प्रकरणों में कर्मचारी सेवा, पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इनमें शिक्षक भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और अवकाश नगदीकरण तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े विवाद हैं।
इसके अलावा नगर निकायों के परिसीमन, अविश्वास प्रस्ताव और अध्यक्ष को हटाने से जुड़े मामले भी हाई कोर्ट में लंबित हैं। ग्राम पंचायत को नगर पंचायत में परिवर्तित करने से संबंधित विवाद भी सूची में शामिल हैं।
ठेकेदारों के भुगतान, वाणिज्यिक कर और मोबाइल टावर शुल्क से जुड़े प्रकरण भी लंबित हैं। इनमें वर्क ऑर्डर की बकाया राशि, भिलाई निगम क्षेत्र के वाणिज्यिक कर और मोबाइल टावर पर लगाए गए चक्रवृद्धि शुल्क से संबंधित विवाद शामिल हैं।
दुर्ग संभाग में भी न्यायालयीन मामलों की स्थिति चिंताजनक है। यहां क्षेत्रीय कार्यालय और संयुक्त संचालक स्तर पर 7 प्रकरण लंबित हैं। राजनांदगांव नगर निगम के 9, भिलाई नगर निगम के 11 और दुर्ग नगर निगम के 7 मामले सूचीबद्ध हैं।
इसके अलावा रिसाली और भिलाई-चरौदा नगर निगम का एक-एक प्रकरण, नगर पालिका परिषदों के 8 तथा नगर पंचायतों के 4 मामले लंबित हैं। इस तरह दुर्ग संभाग में कुल 48 प्रकरणों में जवाबदावा लंबित है।
इन मामलों में प्रधानमंत्री आवास योजना, अतिक्रमण, दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, मुआवजा, अवैध निर्माण, पदोन्नति, निलंबन, संपत्ति कर, मोबाइल टावर, ठेका भुगतान और सेवा संबंधी विवाद शामिल हैं।
