15 साल पुराने फर्नीचर घोटाले में EOW-ACB की कार्रवाई, विशेष न्यायालय में चालान दाखिल

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अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2010-11 में सामने आए फर्नीचर घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच पूरी कर ली है। दोनों एजेंसियों ने मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अंबिकापुर में करीब 20 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। इस मामले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय सहित 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी, 409 और 420 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

यह मामला वर्ष 2010-11 का है, जब अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए करीब 2.70 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अंबिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर और जिला मिशन संचालक की स्वीकृति के बाद CSIDC की निर्धारित दरों पर 10 फर्मों को खरीदी के आदेश जारी किए थे।

28 मार्च 2011 को सप्लायरों के नाम 2 करोड़ 68 लाख 18 हजार 838 रुपये के चेक जारी किए गए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, स्कूलों में फर्नीचर पहुंचने और उसका भौतिक सत्यापन होने के बाद ही भुगतान किया जाना था। हालांकि, जांच में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए फर्नीचर की आपूर्ति से पहले ही भुगतान कर दिया।

EOW और ACB की जांच में भुगतान और फर्नीचर की आपूर्ति को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच के अनुसार, दर्शन फैब्रिकेटर के नाम जारी क्रय आदेश का इस्तेमाल आकृति प्रिंटिंग प्रेस के संचालक संजय पटेल ने किया। आरोप है कि उसने इसी नाम से बैंक खाता खोलकर 29.17 लाख रुपये निकाल लिए, जबकि संबंधित फर्म की ओर से एक भी फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की गई।

पूछताछ के दौरान संजय पटेल ने कथित तौर पर तत्कालीन DMC सत्यप्रकाश पाण्डेय को 7 लाख रुपये कमीशन देने की बात स्वीकार की। इसके अलावा, महारानी स्टील को 11.44 लाख रुपये का भुगतान होने के बावजूद फर्नीचर की आपूर्ति नहीं किए जाने का मामला भी जांच में सामने आया।

वहीं, अन्य आठ फर्मों पर निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर की आपूर्ति करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे मामले में 67 लाख 48 हजार रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।

फर्नीचर घोटाले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक और विभिन्न फर्मों से जुड़े संचालकों सहित कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों की सूची इस प्रकार है:

  1. सत्यप्रकाश पाण्डेय — तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक
  2. संजय पटेल — आकृति प्रिंटिंग प्रेस/दर्शन फैब्रिकेशन से संबंधित
  3. अजय कुमार अग्रवाल — अंबिका अलमीरा एंड स्टील फैब्रिकेटर्स के संचालक
  4. ममता अग्रवाल — सेलेनो स्टील की संचालिका
  5. बिधी सिंह कटलारिया — महामाया फैब्रिकेटर्स के संचालक
  6. राजकुमार बंसल — सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज के संचालक
  7. संदीप तिवारी — श्री साईं इंडस्ट्रीज के संचालक
  8. हितेश कुमार अग्रवाल — श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के संचालक
  9. रितेश कुमार अग्रवाल — श्री श्याम इंडस्ट्रीज के संचालक
  10. संजीव गुप्ता — पंकज फर्नीचर मार्ट के संचालक

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। अब जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा सुनाया जाएगा।

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