कोर्ट से सजा के 24 दिन बाद भी शिक्षक पर कार्रवाई नहीं, बिलासपुर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बिलासपुर। जिले के स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में अदालत से दोषी करार दिए गए शिक्षक के खिलाफ अब तक विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है। तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को शिक्षक विवेक गुप्ता को सजा सुनाई थी। इसके बावजूद 24 दिन बीतने के बाद भी वह बेलमुंडी स्कूल में कार्यरत है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने शिक्षक विवेक गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 323 के तहत भी एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर दोनों धाराओं में एक-एक महीने के अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान किया गया है।
अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनका हाथ पकड़कर खींचा, उनके सीने पर हाथ लगाया और गाली-गलौज की। विरोध करने पर मारपीट करते हुए उन्हें दीवार की ओर धकेल दिया, जिससे उनके चेहरे और सिर में चोटें आईं। पीड़िता ने तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया था।
अदालत ने पीड़िता की गवाही, अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर छेड़छाड़ तथा मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर पीछा करने, अश्लील गाली-गलौज और आपराधिक धमकी से जुड़े आरोपों में शिक्षक को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
अधिवक्ता अनुराग वाजपेयी के अनुसार, किसी शासकीय कर्मचारी को आपराधिक मामले में सजा मिलने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए दंड दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार विस्तृत विभागीय जांच के बिना भी कार्रवाई संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि शिक्षक ने जानबूझकर अपनी दोषसिद्धि की जानकारी विभाग से छिपाई है, तो इस पहलू की जांच की जा सकती है। हालांकि, दोषसिद्धि की जानकारी नहीं देने मात्र से धोखाधड़ी या आपराधिक न्यासभंग का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं होता। इसी तरह, पहले से प्राप्त वेतन की वसूली भी अपने आप नहीं की जा सकती।
जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने कहा कि उन्हें शिक्षक को सजा सुनाए जाने की जानकारी नहीं है। न्यायालय का आदेश विभाग तक क्यों नहीं पहुंचा, इसकी जानकारी ली जाएगी। उन्होंने मामले को प्राथमिकता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है।
अब सवाल यह है कि अदालत से सजा मिलने के बाद भी संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इस मामले में क्या कदम उठाए हैं।
