अब जमानत याचिकाओं पर 2 महीने में फैसला करने की कोशिश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिफिकेशन

जारी अधिसूचना में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 225 और 227 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट नियम, 2007 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
दो महीने के भीतर नियमित जमानत याचिकाओं के निराकरण का प्रयास
अधिसूचना के मुताबिक, हाईकोर्ट के नियम 120 के मौजूदा उपनियम (3) में बदलाव किया गया है। अब जिस तारीख को किसी जमानत आवेदन पर पहली बार सुनवाई होगी, उस तारीख से दो महीने के भीतर उसका निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। यानी नियमित जमानत याचिकाओं के मामलों में सुनवाई की पहली तारीख से दो महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अग्रिम जमानत आवेदनों के त्वरित निराकरण पर भी जोर दिया गया है। ऐसे मामलों में आवेदन पहली बार पेश होने की तारीख से छह सप्ताह के भीतर फैसला करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
दरअसल, सत्येन्द्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई (2022) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने देशभर की अदालतों में जमानत आवेदनों के शीघ्र निराकरण और अनावश्यक गिरफ्तारियों पर रोक लगाने पर जोर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सात साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। पहले सीआरपीसी की धारा 41 और 41A के तहत पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता था। अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35 में इससे संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, यदि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है तो अनावश्यक रूप से उसकी गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए। केवल चार्जशीट दाखिल करने या अदालत में पेशी के दौरान गिरफ्तारी को अनिवार्य नहीं माना जा सकता।
इसके अलावा, गिरफ्तारी से पहले नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नोटिस भेजने की वैधता को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग फैसलों में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं।
इस संशोधन से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं के त्वरित निराकरण को गति मिलने की उम्मीद है।
