गर्मी में चाहिए ठंडक के साथ सेहत, रात के बचे चावल से बनाएं सुपरफूड बोरे बासी, रहेगा शरीर फिट और हाइड्रेटेड

न्यूजरूम | छत्तीसगढ़ की समृद्ध खान-पान संस्कृति में एक अनमोल व्यंजन है बोरे बासी, जो सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. यह साधारण सा दिखने वाला पारंपरिक भोजन छत्तीसगढ़ के हर घर में पीढ़ियों से खाया जाता रहा है. खास बात यह है कि यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि शरीर को ठंडक देने वाला, पोषण से भरपूर और कई रोगों से बचाने वाला आहार है.
छत्तीसगढ़ में भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि एक संस्कृति है. इसी संस्कृति का अहम हिस्सा बोरे बासी है. जिसे रात के बचे हुए चावल को पानी में भिंगोकर तैयार किया जाता है. यह ठंडा और हल्का भोजन गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक प्रदान करता है. इसके साथ प्याज, अचार, चटनी, दही और भजिया का स्वाद इसे और खास बना देता है.
विटामिन बी12 से भरपूर बोरे बासी न सिर्फ पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है, बल्कि ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करता है. इस पारंपरिक भोजन में आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करती है.
बोरे बासी बनाने की खास रेसिपी के बारे में रात के बचे हुए पके चावल को एक बर्तन में लें. उसमें साफ पानी डालें और रातभर भिंगोकर रख दें. सुबह इसे दही, नमक, प्याज और अचार के साथ परोसें. चाहें तो इसके साथ चना या भजिया भी खा सकते हैं.
डॉ. अनुज कुर्रे ने बोरे बासी को गर्मी के दिनों में शरीर के लिए फायदेमंद बताते हुए कहा कि यह विटामिन बी12 से भरपूर है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. साथ ही ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है. वहीं हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए फायदेमंद है. इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम होता है, जो शरीर को मजबूती बनाता है.
यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाता है. बोरे बासी न सिर्फ छत्तीसगढ़ की संस्कृति की पहचान है, बल्कि इसे सुपरफूड कहा जाए तो गलत नहीं होगा. अगर आप भी पारंपरिक और सेहतमंद भोजन अपनाना चाहते हैं, तो इस बार जरूर बोरे बासी का स्वाद जरूर लें.