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नाराज ग्रामीणों ने NTPC के DGM पर फेंका राख, सुरक्षाकर्मियों ने मुश्किल से बचाया

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कोरबा। राखड़ बांध से उड़ने वाले राख से परेशान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन स्थल पर समझाइश देने पहुंचे अधिकारी को देखते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए ग्रामीणों ने अधिकारी के ऊपर राख फेंक दिया। अफसर के साथ सीआईएसएफ के जवान भी थे। घटना से अवाक जवानों ने मौके की नजाकत को समझते हुए ग्रामीणोें की भीड़ से अफसर को बाहर निकाला और सुरक्षित लेकर निकल गए|

ग्राम धनरास के ग्रामीणों ने बताया कि एनटीपीसी द्वारा राखड़ डैम निर्माण के लिए उनकी उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया है। अधिग्रहण के दौरान अफसरों ने जो वायदे किए उसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। राखड़ डेम से उड़ती राख के कारण धनरास सहित आसपास के गांव पुरैनाखार, झोरा, छुरीखुर्द, घोरापाठ, घमोटा और लोतलोता के ग्रामीणों की परेशानी ज्यादा ही बढ़ गई है। प्रदूषण और राख के धूल के कारण गांव में रहना मुश्किल हो रहा है। जानमाल का खतरा के साथ ही फसल भी चौपट हो रही है।

राखड़ बांध से पानी सीपेज होने की वजह से गांव की अधिकांश कृषि भूमि दलदल में तब्दील हो चुकी है।

28 अक्टूबर 2024 को एनटीपीसी प्रबंधन ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में प्रभावितों के साथ एक समझौता किया था, इसमें विस्थापितों को रोजगार, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, राख समस्या का समाधान और मुआवजा जैसी शर्तें शामिल थीं। लेकिन इन मांगों में से एक भी वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है।

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने राख परिवहन का काम रोक दिया, तब एनटीपीसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारी को देखते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बिना कुछ कहे अफसर पर सीधे राख फेंक दिया।

विवाद के बाद जब मामला शांत हुआ तब विधायक प्रेमचंद पटेल, पूर्व सरपंच छत्रपाल कंवर, प्रशासन की ओर से एसडीएम, तहसीलदार की उपस्थिति में ग्रामीणों के साथ चोरभट्टी में बैठक हुई। इस दौरान एनटीपीसी के अधिकारियों ने सीपेज की समस्या का जल्द निराकरण करने तथा उड़ती राख को रोकने के लिए पानी छिड़काव किेए जाने का आश्वासन दिया। मुआवजा के संबंध में कहा कि जल्द सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और मुआवजा का भुगतान कर दिया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी सभी मांग जल्द पूरी नहीं होती है तो पुन: उग्र आंदोलन करते हुए राखड़ बांध का काम बंद कराया जाएगा।