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प्राईवेट अस्पतालों में आई.सी.यू. व वार्ड के शुल्क की दर बेहिसाब

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दुर्ग। राज्य व जिले की निजी अस्पतालों में आई.सी.यू. व वार्डो का शुल्क बेहिसाब है। हर निजी अस्पताल इसकी आड़ में मरीजों से मनमानी राशि वसूल रहे है। इसका सर्वाधिक दुष्परिणाम मध्यम वर्ग के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार गरीब वर्ग के लिए निजी अस्पताल में इलाज महज सपना बनकर रह गया है। उच्च व आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को कोई दिक्कत व परेशानी नहीं है लेकिन मध्यम वर्ग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। वर्तमान में सरकार निजी अस्पतालों को इलाज के लिए अनुमति दे रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को चिकित्सा का लाभ मिले यह उपयुक्त कदम है लेकिन सरकार में निजी अस्पतालों को इलाज के लिए शुल्क की कोई मानक दर अभी तक तय नहीं की है। इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी अस्पताल संचालक उठा रहे है।

बताया गया है कि हर निजी अस्पतालों में आई.सी.यू. और वार्डो का शुल्क अलग-अलग है। कोई अस्पताल आई.सी.यू. में एक दिन का चार्ज 15 हजार ले रहा है। कोई एक दिन का 20 से 25 हजार ले रहा है। इस शुल्क के बाद भी हैण्डग्लोब्स,सैनिटाइजर व अन्य आवश्यक चीजों के शुल्क भी अलग से वसूले जा रहे है। यह मरीजों पर डाला जाने वाला अनावश्यक बोझ है इसे इन्सुरेन्स कंपनी भी मान्य नहीं करती।

जानकारी में यह भी पता चला है कि इनश्योरेंस कंपनी अपना घाटा बचाने के चक्कर में प्रीमियम बढ़ाती जा रही है। जबकि सबसे बड़ा कारण अस्पताल का बिल है। जिसका मापदन्ड पिछले तीन साल से तिगुना हो गया है। इससे आम जनता त्रस्त है मूल्य न चुकाने की स्थिति में कई बार उसे अपने परिजनों के जीवन से भी हाथ धोना पड़ जाता है। इस प्रकार निजी अस्पतालों की मनमानी में मरीजों को नुकसान पहुंच रहा है।

बताया गया है कि बड़े निजी अस्पतालों ने जीवन रक्षक दवाओं की कीमत 100 से 1000 गुना होती है। जो सामान्य परिवार की पहुंच से काफी अधिक होता है। शहर के जागरूक लोगों द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को इस बाबत पत्र लिखा गया है और उसके लिए संसद में विधेयक लाकर मानक दर तय करने की मांग की गई है।