सीजी पीएससी 2021 मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- जिन अभ्यर्थियों पर नहीं है चार्जशीट, उन्हें 60 दिन में दी जाए नियुक्ति
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विवादों में घिरी लोक सेवा आयोग की नियुक्तियों को लेकर मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ सीबीआई ने अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है, उन्हें 60 दिन के भीतर नियुक्ति दी जाए।
इस फैसले से उन 44 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो अब तक नियुक्ति के इंतजार में थे। कोर्ट का यह आदेश न केवल उनके भविष्य को एक दिशा देगा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद को भी मजबूत करेगा।
सीबीआई जांच के अधीन रहेगा पूरा मामला
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नियुक्तियां सीबीआई जांच और न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इसका अर्थ यह है कि नियुक्ति भले दी जा रही हो, लेकिन यदि भविष्य में जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो उस पर कार्रवाई संभव होगी।
राज्य सरकार की दलील थी कि जब तक मामले में जांच पूरी नहीं होती, नियुक्तियां रोक दी जाएं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जांच लंबी चल सकती है और इस दौरान निर्दोष उम्मीदवारों को नियुक्ति से वंचित रखना अन्यायपूर्ण होगा।
44 अभ्यर्थियों ने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि सीजी पीएससी 2021 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्य में काफी विवाद हुआ था। पीएससी में कथित गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद राज्य शासन ने यह मामला सीबीआई को सौंपा था। जांच में अब तक केवल 4 अभ्यर्थियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
वहीं दूसरी ओर, जिन 44 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिली थी, उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि जब उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और सीबीआई ने चार्जशीट भी दाखिल नहीं की है, तो उन्हें नियुक्ति से वंचित रखना न केवल मानसिक और आर्थिक शोषण है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन भी है।
सरकार को अब तय समय सीमा में देनी होगी नियुक्ति
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सरकार पर दबाव है कि वह निर्धारित 60 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करे। सरकार ने पहले कोर्ट में कहा था कि वह केवल कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही कोई निर्णय लेगी। अब जब स्पष्ट निर्देश मिल गया है, तो नियुक्ति प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।
इस फैसले से न सिर्फ इन 44 अभ्यर्थियों को न्याय मिला है, बल्कि यह पूरे देश में इस बात का उदाहरण भी बनेगा कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान होता है।