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छत्तीसगढ़ में स्कूलों की मरम्मत को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर, सभी कलेक्टरों को सेक्रेटरी ने भेजा पत्र

sikcha

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा को मजबूत आधार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को एक सख्त निर्देश वाला पत्र भेजा है। इसमें राज्यभर के चिन्हांकित स्कूल भवनों की मरम्मत को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है, ताकि नया शिक्षा सत्र 2025-26 बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।

पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मरम्मत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन स्कूल भवनों की हालत अत्यधिक खराब है, वहां बच्चों को किसी अन्य सुरक्षित शासकीय भवन में पढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी।

हर जरूरी काम को मिलेगी प्राथमिकता

सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में उन महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों की विस्तृत सूची भी दी गई है, जिन्हें जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इनमें छतों की मरम्मत, दीवारों में पड़ी दरारों का सुधार, खिड़की-दरवाजों की मरम्मत, फर्श को सुरक्षित बनाना, शौचालयों की सफाई और मरम्मत, पीने के पानी की व्यवस्था और आंतरिक विद्युत प्रणाली को दुरुस्त करना शामिल है।

इसके अलावा, जहां स्कूल परिसर में जल भराव होता है, वहां नालियों की समुचित निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है। सभी कार्यों को या तो शिक्षा विभाग द्वारा आबंटित राशि से या फिर डीएमएफ, सीएसआर, सीएसए फंड के तहत पूरा किया जाएगा।

स्कूलों की संरचनात्मक सुरक्षा भी बनी प्राथमिकता

छत्तीसगढ़ सरकार अब केवल शैक्षणिक गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि स्कूलों की भौतिक संरचना को भी प्राथमिकता दे रही है। यह पहल राज्य के लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी है, जो लंबे समय से जर्जर भवनों में पढऩे को मजबूर थे।

अब शासन ने दो टूक निर्देश देते हुए साफ कर दिया है कि जर्जर भवनों में किसी भी हाल में कक्षाएं नहीं चलेंगी। इससे ना केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि माता-पिता के मन में भी विश्वास बढ़ेगा कि उनका बच्चा एक सुरक्षित माहौल में शिक्षा ले रहा है।