Google Analytics —— Meta Pixel

तलाक लेने के बाद आदेश निरस्त करने की मांग हाईकोर्ट ने की खारिज, कहा-आप सहमति से अलग हुए, अब ये फैसला नहीं बदलेगा

cort

बिलासपुर। तलाक के बाद भी शादी की सालगिरह मनाना और घूमना दंपती को महंगा पड़ गया। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक मंजूर करने के फैसले को निरस्त करने से इनकार करते हुए महिला की अपील खारिज कर दी है। तलाक के बाद भी रिश्ते सुधरने पर दोनों ने तलाक की डिक्री निरस्त करने की मांग की थी। दोबारा साथ रहने के दावे के सबूत के तौर पर तस्वीरें भी पेश की, पर कोर्ट ने रियायत नहीं दी।

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि तलाक सहमति से हुआ है, इसलिए अब अपील की जगह नहीं है। कानून भावनाओं से नहीं, तथ्यों व प्रक्रियाओं से चलता है। बिलासपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाली महिला की शादी मोपका निवासी युवक से हुई थी।

शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच रिश्ते बिगड़े और उन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत तलाक की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया। फैमिली कोर्ट से 4 जनवरी 2025 को पारस्परिक सहमति से तलाक मंजूर करने के बाद डिक्री भी पारित की। तलाक लेने के बाद दोनों के बीच दोबारा बातचीत होने लगी। दोनों ने तलाक लेने के दो माह बाद 11 मार्च से 15 मार्च 2025 तक मथुरा की यात्रा की। साथ में ट्रेन की टिकट और होटल की बुकिंग कराई।

हाई कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दोनों ने 9 दिसंबर 2024 को आवेदन देकर 6 महीने की कूलिंग पीरियड हटवाने की मांग की थी। वे अगस्त 2022 से अलग रह रहे हैं, सबूतों के आधार पर फैमिली कोर्ट ने तलाक का फैसला दिया। अब उस फैसले के खिलाफ अपील करना कानूनन मान्य नहीं है। अभिनव श्रीवास्तव बनाम आकांक्षा श्रीवास्तव केस का हवाला कोर्ट ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सहमति से तलाक लेने के बाद अपील नहीं की जा सकती।