NEET UG परीक्षा में गड़बड़ी पर बड़ा फैसला: बदल सकता है क्वेश्चन पेपर; एग्जाम प्रक्रिया में हो सकते है ये सुधार..जानिये क्या?
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG में अब बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस परीक्षा को पेन एंड पेपर मोड से हटाकर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने की योजना बना रही है। पिछले दो सालों से NEET परीक्षा में पेपर लीक, सेंटर की सुरक्षा, पहचान की गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर सवाल लगातार उठते रहे है, जिसे देखते हुए यह बड़ा फैसला लिया गया है।
क्या है बदलाव की योजना?
NTA ने सुधारों का रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले छात्रों, पैरंट्स, टीचर्स और विशेषज्ञों से राय ली जाएगी कि, क्या NEET को CBT मोड में शिफ्ट किया जा सकता है। MyGov प्लेटफॉर्म पर जल्द ही फीडबैक प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जहां आम लोग अपने सुझाव दे सकेंगे।
आपको बता दें कि, NEET UG में हर साल करीब 23 लाख छात्र आवेदन करते हैं और हाजिरी 96-97% तक रहती है। ऐसे में CBT मोड में शिफ्ट करना एक बड़ा फैसला होगा। अभी यह परीक्षा एक ही दिन और एक ही शिफ्ट में होती है, जबकि CBT मोड में कई शिफ्ट्स में परीक्षा आयोजित की जाती है।
पारदर्शिता और सुरक्षा पर फोकस
NTA की योजना में आधार-बेस्ड प्रमाणीकरण और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन को पूरी तरह लागू करना शामिल है। साथ ही रीयल टाइम वीडियो निगरानी और सुरक्षित परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इससे पेपर लीक और फर्जीवाड़े की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
क्वेश्चन पेपर पैटर्न में भी बदलाव संभव
वहीं, MBBS और BDS जैसे कोर्सेस में दाखिले के लिए होने वाली इस परीक्षा के क्वेश्चन पेपर पैटर्न और रिजल्ट एनालिसिस पर भी विचार किया जा रहा है। CBT मोड में पेपर छपाई, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज की समस्याएं खत्म हो जाएंगी। इससे परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता बढ़ेगी। NEET पर कोई भी अंतिम फैसला शिक्षा मंत्रालय और NTA अकेले नहीं ले सकते। चूंकि यह मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी भी जरूरी होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय देश में मेडिकल एडमिशन की प्रक्रिया को देखता है।
पिछले सालों में NEET परीक्षा में गड़बड़ी की कई शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। इस समिति ने सुरक्षित परीक्षा केंद्र, डिजिटल पहचान और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को मजबूत करने की सिफारिशें दी थीं।
NTA के अधिकारियों का कहना है कि, CBT मोड में सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित परीक्षा केंद्रों का चयन है। 2025 में आधार-बेस्ड बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण यह पूरी तरह सफल नहीं हो पाया।
सरकार का मानना है कि, इतने बड़े बदलाव से पहले छात्रों की राय लेना बेहद जरूरी है। CBT मोड में परीक्षा देने के लिए छात्रों को तकनीकी रूप से तैयार करना भी एक अहम पहलू होगा। अब देखना यह है कि, क्या देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा NEET UG भी JEE की तरह ऑनलाइन हो जाएगी या फिर पुराने पेन एंड पेपर मोड का रूल बना रहेगा।