Google Analytics —— Meta Pixel

जीएसटी 2.0 के बाद घटे दाम, लेकिन दुकानदार अब भी वसूल रहे पुरानी एमआरपी वित्त मंत्री ने दी सख्त चेतावनी

op chodhari

रायपुर। देशभर में 22 सितंबर से लागू हुए जीएसटी 2.0 के तहत साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बल्ब, स्टेशनरी से लेकर दवाइयों और सीमेंट तक की कीमतों में जीएसटी दरें घटा दी गईं हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके ठीक उलट दिख रही है।

राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के कई शहरों में दुकानदार अब भी ग्राहकों को पुरानी एमआरपी के आधार पर सामान बेच रहे हैं, जबकि नई दरें लागू हो चुकी हैं। इस पर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि “नई दरें लागू हो चुकी हैं, ग्राहक पुराने रेट पर सामान लेने से इनकार कर सकते हैं और शिकायत कर सकते हैं।”

राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ कहा है कि दुकानदार अगर पुराने स्टॉक का हवाला देकर उपभोक्ताओं से जीएसटी कटौती का लाभ नहीं दे रहे हैं, तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा, “यदि कोई दुकानदार घटे हुए जीएसटी रेट के बावजूद पुरानी एमआरपी पर ही सामान बेच रहा है, तो ग्राहक उसे नई दरों के अनुसार सामान देने के लिए कह सकते हैं। यदि दुकानदार न माने, तो ग्राहक टोल फ्री नंबर 1915 या व्हाट्सएप नंबर 8800001915 पर इसकी शिकायत कर सकते हैं।”

चौधरी ने बताया कि यह शिकायत केंद्र सरकार के पोर्टल पर सेंट्रलाइज्ड रूप से दर्ज होगी और संबंधित राज्य को भेज दी जाएगी। ग्राहक को एसएमएस के जरिए कंप्लेंट नंबर मिल जाएगा जिससे वह अपनी शिकायत को ट्रैक भी कर सकेगा।

पुराना स्टॉक, नया रेट कैसे लगाएं ?

व्यापारियों का कहना है कि वे पुराने स्टॉक पर नए रेट से सामान बेचने में नुकसान उठाएंगे। कुछ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हमने यह माल पुरानी दर पर खरीदा है। अब उसे नई दर पर बेचेंगे तो नुकसान होगा। नया स्टॉक आएगा तब नई एमआरपी लागू होगी।”

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने निर्देश दिए हैं कि पुराने स्टॉक पर भी री-स्टिकरिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि ग्राहक को लाभ मिल सके। यह दर्शाता है कि छोटे और मध्यम दुकानदार या तो जानबूझकर नई दरें लागू नहीं कर रहे हैं या उन्हें अभी पूरी जानकारी नहीं है।