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धर्मांतरण पर सरकार बेहद सख्त, चंगाई सभा पर लगे रोक, नहीं तो होगी कार्रवाई, सीएम साय ने कहा- एसपी के जूतों की धमक होनी चाहिए

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रायपुर। कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन सीएम विष्णुदेव साय के कड़े तेवर दिखे. चंगाई सभा को लेकर सीएम साय ने कड़ी नाराजगी जताई और चंगाई सभा पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए. साथ ही धर्मांतरण पर पूर्ण रोक लगाने की बात कही.

सीएम ने कोरबा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद एसपी के काम पर नाराजगी जताते हुए जमकर फटकार लगाई. उन्होंने कहा, एसपी के जूतों की धमक शहर तक आनी चाहिए. कलेक्टर-एसपी के बीच तालमेल नहीं होने से बलौदबजार जैसी घटनाएं होती है. छोटे अपराध पर लगाम नहीं लगते और वही बड़े रूप लेते हैं. गृहमंत्री विजय शर्मा ने महासमुंद एसपी को चालान समय पर पेश नहीं होने को लेकर कड़ी फटकार लगाई. गृहमंत्री ने कहा, महासमुंद छत्तीसगढ़ से बाहर नहीं है.

सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए, जिससे अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का अहसास उत्पन्न हो. सीएम साय आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समग्र स्थिति, मादक पदार्थ नियंत्रण, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई. इस अवसर पर गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

सीएम साय ने कहा कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है. जिन जिलों में दोनों के बीच समन्वय मजबूत है, वहां बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को प्रशासनिक उदासीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी.

सीएम ने निर्देश दिए कि सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने, चाकूबाजी और हत्या जैसे जघन्य अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए. गौ-तस्करी और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामलों पर सघन निगरानी रखी जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि जिन जिलों ने अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार किया है, उनके अनुभवों को अन्य जिलों में मॉडल के रूप में लागू किया जाए.