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कोयला और फ्लाई ऐश परिवहन करने वाली गाड़ियों को तिरपाल से ढकने हाई कोर्ट का निर्देश

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बिलासपुर। कोरबा में फ्लाई ऐश, धूल और जर्जर सड़कों की वजह से आम लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कंपनियों और लोक निर्माण विभाग से दो सप्ताह के भीतर समस्या के स्थायी समाधान के लिए रोडमैप देने को कहा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मंडल और मुख्य सचिव के हलफनामों के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई है। डिवीजन बेंच ने कोयला और फ्लाई ऐश परिवहन करने वाली गाड़ियों को तिरपाल से ढककर चलाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट कमिश्नर रविंद्र शर्मा ने रिपोर्ट में बताया कि माणिकपुर माइंस तक जाने वाली सड़क पर कीचड़, धूल और फ्लाई ऐश फैला हुआ है, जिससे दुर्घटनाओं और जाम का खतरा बना रहता है। हाई कोर्ट ने माना कि सड़कों की दुर्दशा ही प्रदूषण, जाम और हादसों की मुख्य वजह है। चूंकि यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन है, इसलिए हाई कोर्ट ने विभाग के सचिव को तुरंत स्थायी सड़क निर्माण शुरू करने और अगली सुनवाई 14 नवंबर 2025 से पहले विस्तृत रिपोर्ट और प्रगति ब्यौरा देने को कहा है। मुख्य सचिव और पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बताया कि पिछले दो साल में परिवहन नियमों के उल्लंघन पर औद्योगिक इकाइयों से 1.43 करोड़ रुपए से अधिक का पर्यावरण मुआवजा वसूला गया है। फ्लाई ऐश की आवाजाही पर निगरानी के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम भी शुरू किया गया है।

एनटीपीसी और बालको से मांगा शपथ पत्र:

हाई कोर्ट ने एनटीपीसी और बालको के चेयरमैन को व्यक्तिगत शपथ पत्र देने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें फ्लाई ऐश प्रबंधन और सड़क रखरखाव की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा देना होगा। इसके अलावा एसईसीएल, एनटीपीसी, बालको और लैंको सहित सभी उद्योगों को पर्यावरण संरक्षण मंडल और राज्य सरकार के साथ दो सप्ताह के भीतर एक संयुक्त बैठक करने का आदेश दिया है। इस बैठक का उद्देश्य फ्लाई ऐश के स्थायी प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और जर्जर सड़कों के सुधार के लिए एक स्थायी रोडमैप तैयार करना है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए कोरबा नगर निगम को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

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