35 साल से फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए मलाईदार नौकरी, राष्ट्रीय SC-ST आयोग ने विभाग से मांगा स्पष्टीकरण
बिलासपुर। फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए आबकारी विभाग में नौकरी हासिल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजेश के फर्जी जाति प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ बिलासपुर तहसील कार्यलय का सील और साइन मिला है। राजेश हेनरी बीते 35 साल से आबकारी विभाग में नौकरी कर रहा है। मध्यप्रदेश ग्वालियर के आबकारी अफसर राजेश हेनरी पर आपराधिक षड्यंत्र कर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है।
राजेश के फर्जी प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ बिलासपुर तहसील के सील और साइन मिला है। छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने राजेश जे अनुसूचित जनजाति ST प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति को भेजा था, लेकिन यह जांच दो साल से लंबित है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। चर्चा इस बात की भी हो रही है, विभाग के अफसरों पर मामले को दबाया जा रहा है।
इंदौर के अधिवक्ता और RTE एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने ग्वालियर के आबकारी विभाग में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी के खिलाफ शिकायत की है। शिकायत के अनुसार राजेश हेनरी ने वर्ष 1990-91 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर आपराधिक षडयंत्र किया, जिसके आधार पर अपने को आदिवासी समुदाय का होना बताकर आबकारी विभाग में नौकरी शुरू की। मध्यप्रदेश के कई जगहों पर पदस्थ रहे और फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 35 साल से सरकारी सेवा में बने हुए है।
अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता का आरोप है, आबकारी विभाग के अफसरों को सालों से पता है, राजेंद्र हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी पर कब्जा जमाया है। लेकिन, उनके इस आपराधिक षडयंत्र को विभाग के अफसर उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे।
राजेंद्र गुप्ता ने सूचना के अधिकार कानून के तहत आबकारी अफसर राजेश हेनरी की जाति प्रमाणपत्र को लेकर विभागीय कार्यालय से जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर पता चला कि राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील के सील और साइन लगे जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है।
जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के दायरा पंजी में साल 1990-91 के प्रकरण की जानकारी ली, तब पता चला कि तहसील कार्यालय में उनके जाति प्रमाण पत्र का प्रकरण ही दर्ज नहीं है।
छत्तीसगढ़ उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र की जांच के लिए राजेश हेनरी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला स्तरीय जाति छानबिन समिति को भेजा है। लेकिन, दो साल से इस मामले की जांच लंबित है।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने बताया कि राजेश हेनरी को अपनी जाति संबंधी सभी दस्तावेजों के साथ बुलाया गया है। लेकिन, वो उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
मामले की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग तक पहुंच गई है। आयोग ने बिलासपुर कलेक्टर व मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
NATIONAL COMMISSION FOR SCHEDULED ट्राइब्स (भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 क के अंतर्गत दीवानी न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करने वाला एक संवैधानिक निकाय) A constitutional body exercising the powers of a civil court under Article 335A of the Constitution of India) आबकारी विभाग, मध्य प्रदेश सरकार मंत्रालय, बल्लभ भवन- भोपाल, मध्य प्रदेश-462004 आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़-493015 कलेक्टर जिला बिलासपुर (छ.ग.) छत्तीसगढ़-495001
विषयः अभ्यावेतक श्री राजेन्द्र कुमार गुमा व्हीस्ल ब्लोअर, 90. एन. जे. टॉवर, पंढरीनाथ, चौराहा, इंदौर, (म.प्र.) से प्राम अभ्यावेदन “श्री राजेश हेनरी (ईसाई कियन) पिता हेनरी माईकल जो वर्तमान में अपर आबकारी आयुक्त, आयकरी आयुक्त कार्यालय ग्वालियर (म.प्र.) है के द्वारा, बिलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य से फर्जी जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर आरक्षण का लाभ प्राप करके, धोखे से शासकीय नौकरी प्राप्त करने के संबंध में।
चूंकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को श्री राजेंद्र कुमार गुना से दिनांक 17/12/2025 में एक याचिका शिकायत सूचना शा हुई है (प्रति नंतर) और आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338क के अंतर्गत ओ प्रदत्त शक्तियों का अनुसरण करते हुए इस मामले का अन्वेषणांच करने का निश्चय किया है, अतः आपसे एतद्द्वमा अनुरोध किया जाता है कि आप सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर अधोहस्ताक्षरी को डाक से या वैयक्तिक रूप से उपस्थित होकर या किसी अन्य संचार साधन से संबन्धित आरोपों मामलों और सूचनाओं पर की गई कार्यवाही से संबन्धित सूचना प्रस्तुत करें।
कृप्या ध्यान रसों कि यदि नियत अवधि में आयोग को आपका जहर प्राप्त नहीं होता है तो आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत उसे प्रदत्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है तथा वैथलिक रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से आर्थर के समक्ष उपस्थित होने के लिए आपको समन जारी कर सकता है।
