सरकार का बड़ा फैसला: शिक्षण संस्थानों के आसपास 500 मीटर तक बना ड्रग फ्री जोन, तंबाकू बेचने वालों में मची हलचल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों को रोकने के लिए गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (NCORD) की बैठक में शिक्षण संस्थानों को ड्रग फ्री जोन बनाने का दायरा 5 गुना बढ़ाकर किया 500 मीटर कर दिया गया है। नया नियम पान ठेला संचालकों और तंबाकू की बिक्री करने वाले कारोबारियों के लिए झटका होगा, क्योंकि दायरा बढ़ने के बाद आबादी वाले अधिकांश इलाकों में तंबाकूयुक्त सामग्रियों की बिक्री नहीं हो सकेगी।
गौरतलब है कि वर्तमान में अधिकांश किराना दुकानों और पान ठेलों में बीड़ी–सिगरेट और तंबाकू के अलावा बड़े पैमाने पर गुटखे की बिक्री होती है। अमूमन गुटखा के साथ तंबाकू का पाउच भी बेचा जाता है। आने वाले समय में इनकी बिक्री अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में रुक जाएगी
राज्य स्तरीय समन्वय समिति (NCORD) की बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और नशाखोरी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अधिकारियों को सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफीम की अवैध खेती और ड्रग्स के कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (NCORD) की दूसरी तिमाही की बैठक में उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा की।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस, डाक विभाग और निजी कूरियर सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने परिवहन और कूरियर सेवाओं पर कड़ी निगरानी रखने तथा तस्करी में उपयोग किए जाने वाले वाहनों को राजसात कर उनकी नीलामी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। साथ ही, अवैध रूप से संचालित केमिकल ड्रग प्रयोगशालाओं की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल छापेमारी और निरीक्षण के निर्देश दिए गए।
बैठक में युवाओं को नशे की चपेट से बचाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग मुक्त क्षेत्र घोषित कर वहां सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने जब्त किए गए मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण (Destruction) की प्रक्रिया को भी तेज करने को कहा।
बता दें कि इससे पूर्व शिक्षण संस्थानों की ड्रग फ्री जोन बनाने का दायरा 100 मीटर था। अब इसे बढ़ाकर 500 मीटर कर दिया गया है। ऐसा करने से शहरी क्षेत्र में अधिकांश इलाके इसके दायरे में आ जाएंगे, क्योंकि शहरों प्रायः आसपास कई स्कूल संचालित होते हैं। ऐसे में 500 मीटर याने आधे किलोमीटर के दायरे या फिर उसके आसपास स्कूल मिल ही जाएंगे। नए नियम का कड़ाई से पालन कराया जाए तो कई इलाके ही ड्रग फ्री जोन बन जाएंगे।
इस बैठक में नशाखोरी से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार हेतु मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश के प्रत्येक जिला अस्पताल में न्यूनतम 10 बिस्तरों वाला नशा मुक्ति केंद्र अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए। आवश्यकतानुसार जिलों में नए नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन शुरू किया जाए। नशामुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। पुनर्वास और सहायता हेतु जारी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर (1333) का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित हो।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में डीजीपी अरुण देव गौतम, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, गृह सचिव नेहा चम्पावत सहित समाज कल्याण, आबकारी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सम्मिलित हुए।