टीएंडसीपी-हाउसिंग बोर्ड की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर दो बिल्डरों के प्रोजेक्ट ध्वस्त

plot

रायपुर। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों ने बताया कि दयमंती इंफ्रास्ट्रक्चर ने पांच एकड़ में कामर्शियल निर्माण के लिए डायवर्सन कराया मगर उसके पीछे लगे 27 हेक्टेयर में बिना डायवर्सन और रेरा के परमिशन के प्लाटिंग कर बेचना प्रारंभ कर दिया। नगर निवेश महकमे को इसका पता चला तो पड़ताल कराई गई। शिकायत सही निकलने पर आज बिल्डर के निर्माण कार्यों को तोड़ दिया गया।

उधर, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से मिल रायपुर के सेजबहार में एक बिल्डर ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की न केवल चार एकड़ जमीन दबा दी बल्कि लेआउट पास होने के बाद भी 79 एलआईजी आवास इसलिए नहीं बनने दिया ताकि उसकी प्रायवेट कॉलोनी के लिए वहां से सड़क निकाली जा सकें। 20 साल बाद इसकी शिकायत हुई तो बोर्ड के कमिश्नर आईएएस अवनीश शरण ने इसकी जांच कराई। जिला प्रशासन द्वारा सीमांकन करने के बाद बोर्ड के अधिकारियों ने आज सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए अनधिकृत रूप से निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है।

बता दें, दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश से 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने हेतु आबंटित की गई थी।

इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 का भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 की भूमि शामिल है। उक्त भूमि पर आवासीय विकास हेतु विकास अनुज्ञा दिनांक 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी।

स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि स्वीकृत ले-आउट के अनुसार 1435 भवनों में से 1327 भवनों का निर्माण किया गया था। इसके अतिरिक्त 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 भवन निर्मित हुए।

मंडल द्वारा किए गए निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्य अवधि के दौरान भूमि विवाद की स्थिति उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका।

सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत कुल 193 एलआईजी भवनों का निर्माण किया गया। हालांकि विवादित क्षेत्र में स्थित 79 भवनों का निर्माण न तो किया जा सका और न ही उनका विक्रय किया गया।

हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर बिना अनुमति सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की।

नितेश कश्यप कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक 3 सेजबहार, रायपुर के नेतृत्व में मंडल की टीम जिसमें अमृत लाल बरमन, संपदा अधिकारी हेमंत निषाद सहायक अभियंता निकिता मिश्रा, उप अभियंता अनुपम राठौर, पेमेंद्र ध्रुव, अमय विक्रम तथा कमलेश दास ने मौके पर पहुंचकर अनधिकृत सड़क को हटाया और भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई की।

मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

रीसेंट पोस्ट्स