सरकारी जमीन फर्जीवाड़ा मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, जूता कारोबारी की अग्रिम जमानत खारिज…
बिलासपुर। सरकारी जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाले छत्तीसगढ़ बिलासपुर के जूता कारोबारी किशोर दयालानी की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जूता कारोबारी पर आरोप है, पटवारी व राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी जमीन का फर्जीवाड़ा किया और बेच दिया।
सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर लाखों की सरकारी जमीन का फर्जीवाड़ा करने के आरोपी सिंधी कॉलोनी निवासी जूता कारोबारी किशोर दयालानी की अग्रिम जमानत याचिका बिलासपुर के अपर सत्र न्यायाधीश वेन्सेस्लास टोप्पो ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, राजस्व अभिलेखों में कूटरचना कर आर्थिक लाभ कमाने का यह गंभीर और संज्ञेय अपराध है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।
किशोर दयालानी ने कस्तूरबा नगर जरहाभाठा में लोइस हीराधर और श्वेता हीराधर से 3 डिसमिल जमीन खरीदी थी। आरोप है, इसके बाद तत्कालीन हल्का पटवारी से मिलकर खसरा फॉर्म पी-2 के राजस्व रिकॉर्ड में पेन से ओवरराइटिंग और कूटरचना की गई। इस 3 डिसमिल जमीन को रिकॉर्ड में 6 डिसमिल दर्शाकर वर्ष 2011 में अनिल मोटवानी और रेशमा मोटवानी को बेच दिया गया। मामले में धोखाधड़ी और कूटरचना का अपराध दर्ज होने के बाद से किशोर दयालानी फरार है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की थी। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अनामिका मिश्रा और आपत्तिकर्ता के अधिवक्ता मुरलीधर चन्द्राकर ने जमानत का विरोध किया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शासकीय राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ कर आम जनता को धोखा देने की प्रवृत्ति समाज में गंभीर संदेश देती है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट है। इसके चलते धारा 482 बीएनएसएस के तहत प्रस्तुत अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकती है।