कलयुगी पिता को उम्रभर जेल, सौतेली बेटी से दुष्कर्म मामले में मिली कठोर सजा, कोर्ट बोला— यह पवित्र रिश्ते की हत्या है
बिलासपुर| विशेष पॉक्सो कोर्ट की अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल की अदालत ने एक दिल दहला देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने अपनी 11 वर्षीय सौतेली बेटी को डरा-धमकाकर लगातार दुष्कर्म करने और उसे गर्भवती करने के आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए आखिरी सांस तक जेल में रहने (आजीवन कारावास) की कठोर सजा सुनाई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, आरोपी का यह कृत्य केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि एक पवित्र विश्वास का कत्ल है। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़िता को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी अनुशंसा की है।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता की मां को उसके पहले पति ने कोरोना काल के दौरान छोड़ दिया था। इसके बाद महिला ने आरोपी के साथ ‘चूड़ी विवाह’ कर लिया और दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। आरोपी, महिला और उसकी 11 वर्षीय मासूम बेटी काम की तलाश में मुंबई गए हुए थे। वहां आरोपी एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत में बतौर सुरक्षा गार्ड (सिक्योरिटी गार्ड) का काम करता था।
घटना 15 जुलाई 2023 की दोपहर की है, जब आरोपी मासूम पीड़िता को मुंबई की एक सुनसान निर्माणाधीन इमारत में ले गया और उसके साथ पहली बार जबरन दुष्कर्म किया। जब डरी-सहमी बच्ची ने इस घिनौनी करतूत की बात अपनी मां को बताने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसे और उसकी मां दोनों को जान से मारने की खौफनाक धमकी दी। इस डर के साए में आरोपी मुंबई में लगातार बच्ची का शारीरिक शोषण करता रहा। इसके बाद जब वे वापस छत्तीसगढ़ लौटे, तो रतनपुर के मुरलीबंद स्थित किराए के मकान में भी आरोपी ने मासूम के साथ अपना जुल्म जारी रखा।
दिसंबर महीने में जब यह परिवार रतनपुर लौटा, तब क्षेत्र में आयुष्मान सर्वे का काम चल रहा था। इसी दौरान स्थानीय सजग मितानिन स्मृति गोपाल की नजर अचानक उस 11 वर्षीय बच्ची पर पड़ी। मितानिन ने देखा कि बच्ची का पेट असामान्य रूप से फूला हुआ था। किसी अनहोनी की आशंका को भांपते हुए मितानिन ने तुरंत इसकी जानकारी बच्ची की मां को दी। इसके बाद पीड़िता को सिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सोनोग्राफी जांच के बाद पुष्टि की कि मासूम बच्ची आठ महीने की गर्भवती है। इसके बाद 16 जुलाई 2024 को रतनपुर थाने में आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कराया गया।
शुरुआती जांच में डरी हुई बच्ची की मां ने पुलिस को गुमराह करने के लिए किसी नशेड़ी युवकों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात कही थी। लेकिन रतनपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी रजनीश सिंह को इस थ्योरी पर संदेह हुआ। उन्होंने मामले की वैज्ञानिक व सूक्ष्मता से पड़ताल शुरू की, तो शक की सुई सीधे सौतेले पिता पर जाकर टिकी। टीआई रजनीश सिंह ने सूझबूझ दिखाते हुए पीड़िता के नवजात शिशु के रक्त का नमूना और संदेही सौतेले पिता का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए राज्य फॉरेंसिक लैब, रायपुर भेजा। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में दोनों का डीएनए पूरी तरह मैच हो गया, जिससे आरोपी का घिनौना चेहरा बेनकाब हो गया।
पुलिस द्वारा न्यायालय के समक्ष अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता गवाह पेश किए गए, जिसे सही पाते हुए अदालत ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई। विवेचना के दौरान सभी पहलुओं पर बारीकी से ध्यान देने, त्वरित कार्रवाई और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन (DNA प्रोफाइलिंग) के जरिए केस को मुकाम तक पहुंचाने के लिए बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने तत्कालीन रतनपुर टीआई रजनीश सिंह की पीठ थपथपाई है। एसएसपी ने सटीक जांच के लिए टीआई रजनीश सिंह को 2000 रुपये के नकद रिवॉर्ड (कैश प्राइज) से पुरस्कृत किया है।