हाई कोर्ट में PIL दाखिल: CSPDCL के नए पोल पर निजी परियोजना की 33 केवी लाइन बिछाने के मामले में केंद्र, राज्य और बिजली कंपनी को नोटिस

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में नियम और मापदंडों का उल्लंघन कर 33 केवी लाइन विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने केंद्र, राज्य सरकार और बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने जवाब पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांगा की। कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह की मोहलत दी है। तय तिथि से पहले राज्य सरकार को जवाब पेश करना होगा।सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच को जानकारी दी गई, निजी कंपनी ने अपना जवाब पहले ही पेश कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रिज्वाइंडर पेश करने की छूट दी है।

बता दें, याचिकाकर्ता ने पहले भी इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। तब याचिकाकर्ता ने सुरक्षा राशि जमा करने से छूट की मांग की थी। हाई कोर्ट ने छूट संबंधी आवेदन को अमान्य करते हुए 7 मई 2026 को जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है, धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना, वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गई। 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी नियमों की अनदेखी की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण कार्य के दौरान CSPDCL के नए पोल लगाए गए। याचिकाकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है, इन्हीं खंभों का उपयोग करते हुए निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी बिछा दी गई है। निजी कंपनी और सीएसपीडीसीएल ने ऐसा इसलिए किया है, वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की जरुरत ना ही ना पड़े।

याचिका में आरोप लगाया है, परियोजना प्रबंधन ने पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य संरचनाओं के लिए वन विभाग तथा जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाते हुए कहा है, बिजली कंपनी के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला।