छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा: गूगल मैप के भरोसे जा रही कार 30 फीट नीचे नदी में समाई
बिलासपुर। आधुनिक तकनीक कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है, इसका एक खौफनाक उदाहरण सोमवार देर रात बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र में देखने को मिला। रात के अंधेरे में अनजान रास्ते पर केवल ‘गूगल मैप्स’ के निर्देशों का पालन कर रहे पांच युवकों की कार भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे एक अधूरे पुल से करीब 30 फीट नीचे अरपा नदी के सूखे हिस्से में जा गिरी।
यह भीषण हादसा तोरवा अंतर्गत दर्रीघाट-ढेंका कर्रा के पास हुआ। कार में सवार सभी युवक रायगढ़ जिले के निवासी हैं, जो कोरबा से होते हुए बिलासपुर के रास्ते किसी निजी काम से रायपुर जा रहे थे। हादसे में कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि चालक एयरबैग और किस्मत के सहारे सुरक्षित बच गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में हादसे की दो बड़ी वजहें सामने आई हैं—पहला, गूगल मैप पर अत्यधिक निर्भरता और दूसरा, कार की अत्यधिक तेज रफ्तार।
युवकों को बिलासपुर से रायपुर जाने वाले मुख्य मार्ग का अंदाजा नहीं था, इसलिए वे नेविगेशन ऐप के बताए रास्ते पर चल रहे थे। ऐप ने उन्हें भारतमाला हाईवे के उस रूट पर भेज दिया जो अभी पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हुआ है। रात का समय होने के कारण हाईवे पर विजिबिलिटी (दृश्यता) कम थी और कार की रफ्तार बहुत तेज थी। पुल के मुहाने पर पहुंचते ही अचानक चालक को अहसास हुआ कि आगे सड़क खत्म हो चुकी है और पुल अधूरा है। वहां सुरक्षा के लिए रखे ड्रम और बैरिकेड्स को देखकर चालक ने पूरी ताकत से ब्रेक लगाए। लेकिन तेज गति और मोमेंटम (गति के प्रभाव) के कारण कार स्किड (फिसल) हो गई। वाहन सुरक्षा घेरे को बेरहमी से तोड़ता हुआ हवा में उछला और सीधे 30 फीट नीचे जा गिरा।
हादसा इतना भीषण था कि कार के नीचे गिरते ही किसी बड़े धमाके जैसी आवाज गूंज उठी। आवाज सुनकर आस-पास के ग्रामीण और वहां काम करने वाले मजदूर तुरंत मौके की तरफ दौड़े। नीचे सूखी नदी में कार पूरी तरह पिचक चुकी थी और उसके भीतर से युवकों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत पुलिस और डायल-112 को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने टॉर्च की रोशनी में नीचे उतरकर कार के दरवाजों को कटर और भारी औजारों की मदद से खोलने का प्रयास शुरू कर दिया।
सूचना मिलते ही डायल-112 और एम्बुलेंस की टीम के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों की सूझबूझ और मदद से घायलों को मलबे में तब्दील हो चुकी कार से बाहर निकाला गया। सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्तमान में दो युवकों का निजी अस्पताल में सघन इलाज चल रहा है, जबकि दो को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। कार चला रहा युवक पूरी तरह सुरक्षित है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों के अनुसार, नेविगेशन ऐप्स पर शत-प्रतिशत भरोसा करना असुरक्षित हो सकता है। इसके कुछ कारण ये हैं-
डेटा रिफ्रेश रेट में देरी: जब कोई नया हाईवे बन रहा होता है या किसी पुल का निर्माण बीच में रुक जाता है, तो सैटेलाइट इमेजरी और एल्गोरिदम को उस बदलाव को अपने सर्वर पर अपडेट करने में कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक का समय लगता है।
शॉर्टकट का लालच: गूगल मैप्स का एल्गोरिदम हमेशा सबसे कम समय और खाली रास्ता (कम ट्रैफिक वाला रूट) दिखाने का प्रयास करता है। इस चक्कर में वह कई बार निर्माणाधीन या प्रतिबंधित सड़कों को भी चालू मानकर यूजर को वहां भेज देता है।
यदि आप रात में या किसी अनजान रूट पर सफर कर रहे हैं, तो इन जीवन रक्षक बातों का ध्यान रखें:
सड़क के संकेतों को प्राथमिकता दें: स्क्रीन पर देखने से ज्यादा ध्यान सड़क के किनारे लगे ‘आगे रास्ता बंद है’, ‘कार्य प्रगति पर है’ या ‘डायवर्जन’ के बोर्ड पर रखें।
सैटेलाइट व्यू का उपयोग करें: यात्रा शुरू करने से पहले ऐप में ‘सैटेलाइट मोड’ ऑन करके देख लें कि आगे कोई नदी या अधूरा पुल तो नहीं दिख रहा है।
स्थानीय लोगों से पूछें: यदि रास्ता बहुत सूना या संदिग्ध लगे, तो ऐप के भरोसे रहने के बजाय किसी स्थानीय नागरिक या टोल प्लाजा पर रास्ता कंफर्म कर लें।
सजग नागरिक बनें: यदि आपको कभी कोई ऐसा रास्ता दिखे जो मैप पर चालू है लेकिन असल में बंद है, तो तुरंत गूगल मैप्स में ‘रिपोर्ट ए प्राब्लम’ (समस्या की रिपोर्ट करें) विकल्प पर जाकर उसे फ्लैग करें ताकि दूसरों की जान बचाई जा सके।