शादी का झांसा देकर शोषण और धर्म परिवर्तन के आरोप पर हाई कोर्ट सख्त, कहा- कार्रवाई न होने पर मजिस्ट्रेट से करें शिकायत

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एनके चंद्रवंशी और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन, निकाहनामा नष्ट करने और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है, यदि पुलिस शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करती, तो पीड़ित के पास संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने का प्रभावी वैधानिक उपाय उपलब्ध है। इसलिए सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर जरहाभाटा, निवासी शाहीन ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में शाहीन ने बताया कि उसने 4 अप्रैल और 4 मई 2026 को सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दी थी। पुलिस ने शेख इस्माइल डल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। महिला का आरोप था कि शेख इस्माल ने शादी का झांसा देकर वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए, बाद में धर्म परिवर्तन कराकर निकाह किया और फिर निकाहनामा नष्ट कर दिया। आरोपी अब वैवाहिक संबंध और बच्चों को अपना नाम देने से भी इंकार कर रहा है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि मकान अपने नाम कराने के लिए उसे लगातार धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता महिला की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता प्रियंक राठी ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था है। यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती तो, पीड़िता सीधे संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन दे सकती है। लिहाजा हाई कोर्ट में रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि जब कानून में प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है, तब सीधे रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने महिला को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका खारिज कर दी।

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