हाई कोर्ट ने कहा: मेरिट सूची में स्थान मिलने से नौकरी तय नहीं होती, भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करेगा फैसला

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बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने उत्तर छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिले में ग्राम पंचायत सचिवों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में कहा है, केवल मैरिट सूची में नाम शामिल होने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति पाने का कानूनी रूप से अधिकार हासिल नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया है, तो मैरिट सूची में शामिल अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए दावा नहीं कर सकता।

रामानुजनगर, सूरजपुर निवासी देवेन्द्र कुमारी साहू ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिला पंचायत सूरजपुर ने वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत सचिव के 11 पदों पर भर्ती के लिए 17 सितंबर 2018 को विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता ने अन्य पिछड़ा वर्ग (महिला) वर्ग से आवेदन किया था और चयन प्रक्रिया के बाद उसका नाम मैरिट सूची में भी शामिल था। सात साल से अधिक समय बीतने के बाद भी नियुक्ति पत्र जारी नहीं होने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने 11 सितंबर 2025 को पंचायत निदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा पेश कर यह बताने को कहा था कि वर्ष 2018 से भर्ती प्रक्रिया लंबित क्यों है। इसके जवाब में 3 नवंबर 2025 को पंचायत निदेशक ने शपथ पत्र पेश कर जानकारी दी थी।

राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2018 में जिला पंचायत सूरजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन के लिए राज्य शासन और वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई थी। इस कारण विज्ञापन नियमों के विपरीत और अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया था। पंचायत निदेशालय के 20 जनवरी 2025 के आदेश के अनुपालन में जिला पंचायत सीईओ ने 22 अक्टूबर 2025 को पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब आधारभूत भर्ती विज्ञापन और उसके आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त हो चुकी है, तब केवल मैरिट सूची में नाम होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा, मैरिट सूची में स्थान प्राप्त करना अपने आप में नियुक्ति का अटूट अधिकार नहीं देता। नियुक्ति का अधिकार तभी लागू हो सकता है, जब भर्ती प्रक्रिया वैध रूप से अस्तित्व में हो और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे निरस्त न किया गया हो।

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