आखिर सावन में हर घर में क्यों पड़ता है झूला, सावन में झूला झूलने की परंपरा का क्या है राज? जानिए इसकी धार्मिक मान्यता और कथा

jhula swing

सावन में हर घर में क्यों पड़ता है झूला : सावन का महीना आते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है। पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं। मौसम सुहावना हो जाता है। इस दौरान मंदिर से लेकर घरों तक में शिवभक्ति का माहौल रहता है। वहीं, एक और चीज है, जो सावन की पहचान मानी जाती है और वह झूला है। आपने देखा होगा कि सावन में लोगों के घरों में झुले डाल दिए जाते हैं। महिलाएं और लड़कियां सज-धजकर झूला झूलती हैं, सावन के गीत गाती हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सावन में झूला लगाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे सिर्फ मौसम ही नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।

आपको बता दें कि सावन को हरियाली, खुशियों और उत्सव का महीना माना जाता है। इस समय मौसम ठंडा और सुहावना होता है। इसलिए पुराने समय से लोग पेड़ों पर झूले डालकर परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताते थे। खासकर महिलाएं और लड़कियां सावन में झूला झूलते हुए लोकगीत गाती थीं। धीरे-धीरे यही परंपरा सावन के सबसे खास रीति-रिवाजों में शामिल हो गई।

धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने सावन के महीने में माता पार्वती के लिए झूला लगाया था और उन्हें प्रेम से झूला झुलाया था। इसी वजह से झूला पति-पत्नी के बीच प्यार, सम्मान और अच्छे रिश्ते का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो दंपति सावन में साथ मिलकर झूला झूलते हैं, उनके रिश्ते में अपनापन और प्रेम बना रहता है। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है और अलग-अलग जगहों पर इसे अलग तरीके से माना जाता है।

एक और कहावत सुनने को मिलती है कि सावन में माता पार्वती अपने मायके आईं थीं। वहां, उन्होंने अपने सखियों के साथ झूला लगाया और झूला भी। इस दौरान उन्होंने लोक गीत गाए और खुशियां मनाई। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

सावन में झूला झूलने की परंपरा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से भी जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के सुहाने मौसम में भगवान कृष्ण ने राधा रानी को झूला झुलाया था। इसके बाद से कई जगहों पर मंदिरों में राधा-कृष्ण के लिए भी सुंदर झूले सजाए जाते हैं। सावन के दौरान कई मंदिरों में झूलन उत्सव भी मनाया जाता है।

सावन में कई मंदिरों में भगवान और देवी-देवताओं के लिए भी झूले सजाए जाते हैं। फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से इन झूलों को सुंदर बनाया जाता है। यह परंपरा कई राज्यों में आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में झूला झूलना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे परिवार में प्यार और एकता बनी रहती है। पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, झूला झूलने से मन भी खुश रहता है और सावन के सुंदर मौसम का आनंद लेने का मौका मिलता है।

आप सावन में अपने घर पर भी झूला डाल सकती हैं। हम आपको आसान तरीका बता रहे हैं-

  • सही जगह चुनें: मजबूत पेड़ की डाल, मजबूत छत का हुक या लोहे की ग्रिल।
  • मजबूत रस्सी चुनें: नायलॉन, सूती या जूट की मोटी रस्सी लें।
  • लकड़ी की पटरी या तख्ता: बैठने के लिए मजबूत लकड़ी का बोर्ड लें।
  • पटरी में छेद करें: बोर्ड के दोनों ओर रस्सी बांधने के लिए दो-दो छेद बनाएं।
  • रस्सी को मजबूती से बांधें: अब तख्ते और हुक पर सेफ्टी नॉट (मजबूत गांठ) लगाएं।
  • सजावट करें: गेंदे के फूलों, आम के पत्तों या सुंदर कपड़ों से झूले को सजाएं।
  • सेफ्टी चेक करें: झूले पर बैठने से पहले थोड़ा वजन डालकर मजबूती जरूर चेक करें।

तो अब तो आप जान ही गईं होंगी कि सावन में झूला लगाने की परंपरा के पीछे मौसम की खूबसूरती के साथ-साथ कई धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। माना जाता है कि इसका संबंध माता पार्वती, भगवान शिव और राधा-कृष्ण से है।

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