45 करोड़ के निवेश का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी, रायपुर पुलिस ने दो महिलाओं को किया गिरफ्तार

रायपुर : रायपुर पुलिस ने करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्यों ने एक कारोबारी को 45 करोड़ रुपए का निवेश दिलाने का भरोसा दिया और साथ ही काले धन को विशेष केमिकल से सफेद करने का झांसा देकर उससे 1.13 करोड़ रुपए ऐंठ लिए। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं को नागपुर से गिरफ्तार किया है। दोनों पर लंबे समय से ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल होने का आरोप है।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय निवासी कोलकाता और दीपिका पालीवाल निवासी उदयपुर राजस्थान के रूप में हुई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह कई राज्यों में इसी तरह की ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। बालोद जिले के रहने वाले उमेश कुमार सिन्हा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। वह सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। कंपनी के विस्तार और नए प्लांट लगाने के लिए उन्हें करीब 45 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत थी।
इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ लोगों के जरिए दीपक सिंह, अभिषेक सिंह, योगी और अन्य आरोपियों से हुई। आरोपियों ने खुद को बड़े लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताया। उन्होंने कारोबारी को भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनी में जल्द ही बड़ा निवेश कराया जाएगा।
ठगों ने कारोबारी का विश्वास जीतने के लिए पूरी योजना बनाई। उन्होंने चेन्नई और नागपुर बुलाकर बड़े अधिकारियों से मुलाकात कराने का दावा किया। इसके अलावा फंड अप्रूवल, सुरक्षा अनुमति और विदेशी जांच प्रक्रिया जैसी बातें बताकर माहौल तैयार किया गया।
गिरोह ने ब्लैक मनी वॉश के नाम पर भी एक कहानी बनाई। आरोपियों ने दावा किया कि विशेष विदेशी केमिकल और तकनीक की मदद से काले रंग में लिपटे नोटों को दोबारा असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है।
इस प्रक्रिया का नकली प्रदर्शन भी किया गया। पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर कारोबारी को भरोसा दिलाया गया कि यह तकनीक वास्तविक है।
विश्वास में आने के बाद कारोबारी से लगातार पैसे मांगे गए। कभी विदेशी केमिकल खरीदने के नाम पर तो कभी टेस्टिंग और अनुमति प्रक्रिया के लिए रकम ली गई। आरोपियों ने फंड रिलीज होने का झांसा देकर कई किस्तों में पैसे लिए।
धीरे-धीरे कारोबारी से कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपए ले लिए गए। काफी समय बीतने के बाद भी न तो निवेश आया और न ही पैसे वापस किए गए। इसके बाद कारोबारी को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के लिए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस ने मोबाइल नंबर, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच शुरू की।
जांच के दौरान दोनों महिला आरोपियों की भूमिका सामने आई। उनकी लोकेशन नागपुर में मिली। इसके बाद पुलिस टीम नागपुर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि यह गिरोह सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। आरोपी नागपुर, लखनऊ और देश के कई अन्य हिस्सों में निवेश दिलाने और ब्लैक मनी को बदलने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर चुके हैं।
पुलिस अब दूसरे राज्यों की पुलिस से संपर्क कर आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपए नकद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड सहित करीब 70 हजार रुपए का सामान जब्त किया है।
दोनों महिलाओं के खिलाफ तेलीबांधा थाने में बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।