₹4 हजार करोड़ की सड़क की पहली बारिश में हालत खराब, धंसने लगा बेस, भारतमाला प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

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भारतमाला कॉरिडोर : देश की महत्वाकांक्षी भारतमाला इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। रायपुर से विशाखापट्टनम के बीच बन रहे इस कॉरिडोर का काम तेजी पर है। छत्तीसगढ़ में इसका एक बड़ा हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है। लेकिन पहली ही मानसूनी बारिश ने इस निर्माण कार्य की मजबूती की हवा निकाल दी है।

तैयार हो चुकी सड़क पर जगह-जगह गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। सड़क की ऊपरी परत उखड़ रही है। बेस धंसने से हादसों की आशंका बढ़ गई है। निर्माण पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद पहली बारिश में ही सड़क का यह हाल हो गया है।

छत्तीसगढ़ के हिस्से में बनी लगभग 106 किलोमीटर सड़क की जमीनी पड़ताल की गई। इस दौरान सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी सामने आई है। इस पूरे रास्ते में 20 से ज्यादा स्थानों पर बड़ी दरारें पाई गई हैं।

इसके अलावा 25 से अधिक जगहों पर सड़क पर पैचवर्क किया गया है। जगह-जगह डामर लगाकर दरारों को छिपाने की कोशिश दिखती है। कुरूद से आठ किलोमीटर पहले केवल एक किलोमीटर के दायरे में ही 10 से ज्यादा पैचवर्क मिले हैं। इससे साफ है कि निर्माण की गुणवत्ता में बड़ी लापरवाही बरती गई है।

सबसे चिंताजनक स्थिति कांकेर जिले में देखने को मिल रही है। यहां दुधावा से धनोरा के बीच सड़क की हालत बहुत खराब है। पुल की ढलान को सहारा देने वाला स्लोप बारिश में बह गया है।

सड़क को ऊंचा उठाने के लिए बनाया गया एप्रोच एम्बैंकमेंट भी पानी के तेज बहाव में धंस गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार बारिश के बाद मिट्टी लगातार दरक रही है। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दुधावा के पास का रास्ता पूरी तरह बंद करना पड़ा।

सड़क बंद होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले चालकों को भारी परेशानी हो रही है। अब गाड़ियां हाईवे छोड़कर पास के गांव की संकरी सड़कों से निकाली जा रही हैं। इससे ग्रामीणों को भी हादसों का डर सता रहा है। टोल प्लाजा के पास से भी आवागमन बाधित हो गया है। भारी वाहनों के गांव से गुजरने से ग्रामीण सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

इस कॉरिडोर में पहाड़ी को काटकर टनल बनाई जा रही है। टनल के आगे ओडिशा सीमा तक लगभग 20 किलोमीटर का निर्माण अधूरा है। इस हिस्से में 10 से अधिक पुल बनाए जा रहे हैं।

लेकिन ज्यादातर पुल अभी मुख्य सड़क से पूरी तरह जुड़ नहीं पाए हैं। कहीं मुरम बिछाई जा रही है तो कहीं गिट्टी डालकर समतलीकरण का काम जारी है। दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य में काम लगभग पूरा हो चुका है।

सड़क निर्माण विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण प्रक्रिया में भारी चूक हुई है। जिस जगह सड़क या पुल बनता है, वहां की मिट्टी के अनुसार सामग्री चुनी जाती है। सामग्री को अलग-अलग परतों में ठीक से बिठाना जरूरी होता है। यदि पहली ही बारिश में सड़क धंस रही है या उसमें दरारें आ रही हैं, तो यह सीधे तौर पर जल्दबाजी और घटिया निर्माण सामग्री की ओर इशारा करता है।

छत्तीसगढ़ में इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 124.661 किलोमीटर है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 4,146.08 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसे कुल तीन पैकेज में बांटा गया है।

सीजी-1 पैकेज झांकी से सरगी तक 42.800 किलोमीटर का है, जिसकी लागत 1,368.19 करोड़ है। दूसरा पैकेज सीजी-2 सरगी से बासनवाही तक 56.700 किलोमीटर का है, जिसकी लागत 1,470.73 करोड़ है। वहीं तीसरा पैकेज सीजी-3 बासनवाही से मरंगपुरी तक 25.161 किलोमीटर का है, जिसकी लागत 1,307.16 करोड़ है।

मामले पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI – National Highways Authority of India) के अधिकारियों का कहना है कि काम अभी प्रगति पर है। तेज बारिश में इस तरह मिट्टी कटने की समस्या हो जाती है। क्षतिग्रस्त हिस्सों और स्लोप की मरम्मत कराई जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ऐसी समस्या नहीं रहेगी।