गोठान में लगातार गायों की मौत से बढ़ी चिंता, क्षमता से दोगुने से ज्यादा मवेशी होने पर उठे सवाल

रायपुर : गोठान में लगातार मवेशियों की मौत की खबर सामने आने के बाद व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कई गायों की मौत हुई है। निरीक्षण के दौरान गोठान परिसर में मृत मवेशी भी पाए गए।
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने गोठान का निरीक्षण करते हुए 8 गायों के मृत मिलने का दावा किया है। उनका कहना है कि गोठान पहुंचने पर परिसर में कई मृत गायें पड़ी हुई मिलीं।
गोठान में बड़ी संख्या में मवेशियों को रखे जाने के कारण चारा, पानी, साफ-सफाई और उपचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, गोठान की अव्यवस्थाओं और मवेशियों की मौत को लेकर पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है। उस दौरान संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।
हालिया निरीक्षण में पानी, चारे और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति भी जांच के घेरे में रही।
गोठान में क्षमता से अधिक मवेशियों की मौजूदगी सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, गोठान की निर्धारित क्षमता करीब 260 गायों की है, जबकि यहां 600 से ज्यादा मवेशी रखे गए हैं।
क्षमता से दोगुने से भी अधिक मवेशियों के कारण पर्याप्त जगह, साफ-सफाई, भोजन, पानी और उपचार की व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है।
गोठान परिसर में कुल चार शेड बताए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में मवेशियों को रखा गया है। रविवार को पड़ताल के दौरान भी बड़ी संख्या में गायें मौजूद थीं।
रिपोर्ट में मौके पर करीब 15 पैकेट बेगान और 7 बोरी खली रखे होने की बात कही गई है। हालांकि, 600 से ज्यादा मवेशियों के लिए उपलब्ध चारा पर्याप्त है या नहीं, इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
गोठान में मवेशियों की मौत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। नगर निगम की ओर से कम संख्या में मौत होने की बात कही गई है, जबकि विपक्ष और स्थानीय स्तर पर इससे कहीं अधिक मवेशियों की मौत का दावा किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 दिनों में 60 से ज्यादा गायों की मौत का दावा किया गया है। शनिवार को भी कई मवेशियों के मरने की बात सामने आई थी। निरीक्षण के दौरान मृत गायें मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
मवेशियों की संख्या अधिक होने के बीच पानी और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बड़ी संख्या में गायों के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता और बीमार या घायल मवेशियों का समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
रिपोर्ट में गोठान की चिकित्सा व्यवस्था को पर्याप्त नहीं होने का आरोप लगाया गया है। ऐसे में बीमार मवेशियों के इलाज, निगरानी और देखभाल की व्यवस्था को लेकर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
गोठान की व्यवस्थाओं से जुड़े भुगतान का मुद्दा भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सालभर के खर्च के तौर पर करीब 25.83 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है, लेकिन यह राशि लगभग 11 महीने से लंबित बताई जा रही है।
भुगतान अटकने का असर चारा, देखभाल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है या नहीं, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पूरे मामले में गोठान की क्षमता, मवेशियों की संख्या, चारा-पानी, चिकित्सा व्यवस्था और लंबित भुगतान की स्थिति की विस्तृत जांच की जरूरत बताई जा रही है।