2,700 की दवा पर 27,000 MRP! जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा—‘दिनदहाड़े डकैती’

नई दिल्ली। गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत के सामने दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठाया गया। जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और मेडिकल डिवाइसेज की कीमतों पर नियंत्रण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने मौजूदा मूल्य निर्धारण व्यवस्था को लेकर सवाल किए।
सुनवाई के दौरान दवाओं की कीमतों में भारी अंतर का एक उदाहरण भी अदालत के सामने रखा गया। बताया गया कि कुछ दवाएं रिटेलर को करीब 2,700 रुपये में उपलब्ध होती हैं, जबकि उनकी MRP 27,000 रुपये तक हो सकती है। इस अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार पहले ही इलाज के खर्च और मानसिक दबाव से परेशान रहते हैं। ऐसे में जीवनरक्षक दवाओं पर अत्यधिक मार्जिन मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
याचिकाकर्ता किशन चंद जैन की ओर से दलील दी गई कि ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत करीब 82 प्रतिशत दवाएं अनुसूचित मूल्य नियंत्रण के दायरे में नहीं आतीं। याचिका में गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमत तय करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
याचिका में मेडिकल डिवाइसेज की अधिकतम कीमत निर्धारित करने और डॉक्टरों के लिए जेनेरिक दवाएं लिखना अनिवार्य करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा रोसुवास की कीमतों का उदाहरण भी सामने आया। अदालत को उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, इसकी एक स्ट्रिप की कीमत करीब 214 रुपये बताई गई, जबकि एस्पिरिन के साथ इसके कॉम्बिनेशन की कीमत लगभग 70 रुपये है। कीमतों में इस अंतर को लेकर भी पीठ ने सवाल किए।
इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दवा की MRP और रिटेलर को मिलने वाली कीमत के बीच का पूरा अंतर दवा निर्माता कंपनी का मुनाफा नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस अंतर में डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट और रिटेलर समेत पूरी सप्लाई चेन के अलग-अलग स्तरों का मार्जिन शामिल होता है।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि सरकार आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का भी उल्लेख किया और किफायती दवाओं की उपलब्धता के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
मामले में अब दवाओं की कीमतों, मूल्य नियंत्रण के दायरे और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।