छत्तीसगढ़ में बिजली संकट का खतरा! हसदेव ताप विद्युत संयंत्र में 5 दिन से भी कम का कोयला स्टॉक, DSPM की इकाई भी बंद

कोरबा : छत्तीसगढ़ में बिजली की बढ़ती मांग के बीच हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (HTPP) में कोयले का भंडार एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। संयंत्र में फिलहाल केवल 74 हजार टन कोयला शेष बताया जा रहा है। मौजूदा खपत की रफ्तार जारी रहने पर यह स्टॉक पांच दिन से भी कम समय में खत्म हो सकता है। ऐसे में प्रदेश की बिजली उत्पादन व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
संयंत्र की इकाइयों का नियमित रखरखाव पूरा होने के बाद उन्हें दोबारा चालू कर पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। इसके चलते कोयले की दैनिक खपत बढ़कर करीब 22 हजार टन तक पहुंच गई है। सीमित भंडार और लगातार बढ़ती खपत के कारण संयंत्र प्रबंधन के सामने कोयले की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
कोयले की कमी को देखते हुए संयंत्र प्रबंधन और बिजली कंपनी ने आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए एसईसीएल की कुसमुंडा खदान से कोयले की आवक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि जल्द से जल्द कोयले की अतिरिक्त रैक उपलब्ध हो, ताकि स्टॉक में सुधार किया जा सके और संयंत्र का संचालन प्रभावित न हो।
यदि समय रहते आपूर्ति में बढ़ोतरी नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल बिजली कटौती की स्थिति उत्पन्न होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
प्रदेश में मौसम खुलने के बाद बिजली की अधिकतम मांग करीब 6 हजार मेगावाट तक पहुंच रही है। उमस भरे मौसम, बारिश की कमी के कारण फसलों की सिंचाई के लिए कृषि पंपों के बढ़ते इस्तेमाल और एसी-कूलर के अधिक संचालन से बिजली की खपत में इजाफा हुआ है।
ऐसे समय में हसदेव ताप विद्युत संयंत्र में कोयले का स्टॉक कम होना चिंता बढ़ाने वाला है। बिजली की मांग पूरी करने के लिए संयंत्रों का सुचारु संचालन और पर्याप्त कोयला उपलब्ध रहना जरूरी है।
दूसरी ओर, डीएसपीएम पावर प्लांट की एक इकाई वार्षिक रखरखाव के चलते बंद बताई जा रही है। इससे राज्य की उत्पादन कंपनी को करीब 250 मेगावाट बिजली उत्पादन का नुकसान हो रहा है। बिजली की बढ़ती मांग और घरेलू उत्पादन में कमी के चलते जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों से बिजली लेनी पड़ रही है।
ऐसे में हसदेव ताप विद्युत संयंत्र में कोयले की आपूर्ति बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में कोयले की उपलब्धता और बंद इकाई के दोबारा शुरू होने की स्थिति प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से अहम रहेगी।
