रायगढ़ के बाद रायपुर नगर निगम की वेबसाइट पर साइबर अटैक, NIC ने बंद किया डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम

रायपुर नगर निगम के कमिश्नर संबित मिश्रा ने बताया कि साइबर थ्रेट मिलने की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। इसके बाद एनआईसी ने सुरक्षा के मद्देनजर डीएमएस को डाउन कर दिया। फिलहाल साइबर हमले के तरीके, सिस्टम की संभावित कमजोरियों और डेटा पर इसके प्रभाव का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, रायपुर नगर निगम की वेबसाइट काफी पुरानी है और ड्रुपल (Drupal) सॉफ्टवेयर पर संचालित होती है। बताया जा रहा है कि पिछले चार वर्षों से वेबसाइट का सिक्योरिटी ऑडिट नहीं कराया गया था। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने सॉफ्टवेयर, समय पर अपडेट नहीं किए गए मॉड्यूल, कमजोर पासवर्ड और एडमिन अकाउंट की अपर्याप्त सुरक्षा जैसी खामियां हैकिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, वेबसाइट में सेंध लगाने के लिए किन तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाया गया, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
नगर निगम का डेटा एनआईसी के भुवनेश्वर स्थित डेटा सेंटर के क्लाउड सर्वर में स्टोर किया जाता है। ऐसे में जांच के दौरान वेबसाइट और संबंधित सर्वर के रिकॉर्ड के साथ-साथ डेटा एक्सेस लॉग की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल नगर निगम के डेटा चोरी होने या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साइबर हमले का प्रभाव केवल वेबसाइट तक सीमित था या नगर निगम के दूसरे डिजिटल सिस्टम भी प्रभावित हुए हैं।
गौरतलब है कि एक दिन पहले रायगढ़ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर भी साइबर अटैक की घटना सामने आई थी। वहां वेबसाइट पर हैकिंग से जुड़ा संदेश और पाकिस्तानी झंडे का प्रतीक दिखाई देने की जानकारी मिली थी। अब रायपुर नगर निगम की वेबसाइट पर भी इसी तरह की घटना सामने आने से सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने सरकारी वेबसाइटों की साइबर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर हमलों से बचाव के लिए नियमित सिक्योरिटी ऑडिट, सॉफ्टवेयर और मॉड्यूल अपडेट, मजबूत पासवर्ड, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और सर्वर की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है।
फिलहाल रायपुर नगर निगम और एनआईसी की ओर से सुरक्षा जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साइबर हमले की वास्तविक वजह और इससे हुए संभावित नुकसान की तस्वीर साफ हो पाएगी।
