छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मेरिट में टॉप करने वाले अभ्यर्थी को 4 सप्ताह में दें पुरातत्व अधिकारी पद पर नियुक्ति

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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की चयन सूची में पहला स्थान हासिल करने के बावजूद पुरातत्व अधिकारी के पद पर नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए अभ्यर्थी जिम्मेदार नहीं है। ऐसे में दूसरे उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच का हवाला देकर उसकी नियुक्ति रोकना उचित नहीं था।
कांकेर जिले के गोविंदपुर निवासी हैग्रिव परिहार ने 31 मई 2023 को जारी विज्ञापन के आधार पर पुरातत्व अधिकारी के पद के लिए आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 17 अगस्त 2023 को जारी मेरिट सूची में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया था।

दस्तावेजों के सत्यापन में भी उनके प्रमाण पत्र सही पाए गए। इसके बाद पुरातत्व एवं संग्रहालय संचालनालय ने 9 अक्टूबर 2023 को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी करने की अनुशंसा कर दी थी। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई।

दरअसल, कुछ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि यह जांच 4 जून 2024 को पूरी हुई थी। इस अवधि में किसी भी अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दी गई।

सरकार ने मेरिट सूची की वैधता बढ़ाने के लिए लोक सेवा आयोग से भी अनुरोध किया था, लेकिन वर्ष 2014 के प्रक्रिया नियमों के नियम 19.2 के तहत सूची की एक साल की अवधि बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि हैग्रिव परिहार के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं थी और न ही उनके दस्तावेजों में कोई कमी पाई गई थी। इसके बावजूद उनकी नियुक्ति रोक दी गई। बाद में मेरिट सूची की वैधता समाप्त होने का हवाला देकर 2 दिसंबर 2024 को सरकार ने उनका अभ्यावेदन भी खारिज कर दिया।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के दस्तावेज सही पाए गए थे और उनके खिलाफ कोई शिकायत या आरोप भी नहीं था। ऐसे में उनकी नियुक्ति रोकने का कोई उचित आधार नहीं था।

अदालत ने माना कि अन्य अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के कारण नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हुई और इसी दौरान मेरिट सूची की वैधता समाप्त हो गई। इस देरी के लिए याचिकाकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2 दिसंबर 2024 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही निर्देश दिया है कि यदि कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो नियमानुसार हैग्रिव परिहार को पुरातत्व अधिकारी के पद पर नियुक्ति दी जाए।

कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया संपन्न कर अपना निर्णय याचिकाकर्ता को सूचित करने का आदेश दिया है।

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